राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत की भाषाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह छात्रों को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद करती है। इससे उनका बौद्धिक विकास होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करती है और बहुभाषावाद को एक महत्वपूर्ण कौशल के रूप में देखती है। इससे छात्रों में राष्ट्रीय एकता की भावना और सांस्कृतिक समझ का विकास होगा। यह 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में सहायता करेगी।उक्त बातें डॉ. विशाखा शुक्ला ने शनिवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, विद्याश्री न्यास, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ व लाल बहादुर शास्त्री स्नातकोत्तर महाविद्यालय की ओर से योग साधना केंद्र में हुई संगोष्ठी में कही। अंतिम दिन के तृतीय सत्र में डाॅ. नीलम ने कहा कि एनईपी छात्रों को भाषाओं का चयन करने में अधिक लचीली रखी गई है। इससे विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की भाषाई विविधता समायोजित की जा सकती है। डाॅ. आशुतोष ने कहा कि इसका उद्देश्य छात्रों की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को बनाए रखना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि वे भारतीय भाषाओं और संस्कृतियों को समझें और उनका सम्मान करें। राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में प्रो. संजय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा की पहुंच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और उत्तरदायित्व जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है। सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो. उदयन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी। स्वागत प्रो. अरुण, संचालन डाॅ. दीपक और आभार धर्मेंद्र ने किया।