श्री ब्रह्मचारी संस्कृत महाविद्यालय के ब्रह्मचारी चतुरानंद सेवा केंद्र तिलमापुर में नवाहन पारायण व यज्ञ की स्वर्ण जयंती वर्ष की शुरुआत हुई। सुमेरू पीठाधीश्वर नरेंद्रानंद सरस्वती ने पूजन अर्चन के साथ विधिवत इसका शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सृष्टि वेद मूलक है और वेद यज्ञ मूलक है तथा वैज्ञानिक और व्यवहारिक रूप से सर्वाधिक प्रमाणित और उपयोगी है। यज्ञ में देवी प्रसाद मिश्रा, नागेश्वर मिश्रा, प्रमोद, चंद्रभान, दुर्गा प्रसाद, विकास, रोहित, सतीश आदि ने आहुतियां डालीं।