श्री बालाजी विद्यापीठ के निदेशक योगाचार्य डॉ. आनंद बालयोगी भावनानी ने कहा कि नाद योग की पारंपरिक पद्धतियां मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन बनाने में प्रभावी है। ध्वनि स्वर और नाद ध्यान व्यक्ति के अंतर्मन को शुद्ध करने में सहायक होते हैं। वह मंगलवार को भारतीय योग अकादमी की ओर से आईएमएस बीएचयू में आयोजित नाद योग चिकित्सा पारंपरिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य विषयक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नाद योग जैसी प्राचीन विधाओं को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से जोड़ते हुए जनमानस तक इसकी उपयोगिता को पहुंचाना आवश्यक है। भारतीय योग अकादमी के अध्यक्ष प्रो. आरजी सिंह, सह अध्यक्ष प्रो. जेएस त्रिपाठी, सचिव प्रो. केएन मुरली, कोषाध्यक्ष डॉ. आरके भाटिया, डॉ. अजय कुमार पांडेय एवं पद्मश्री राजेश्वर आचार्य ने विचार रखे। संचालन अनुजा कुमारी और हेमंत कुमार कोरी ने किया।