नगर निगम प्रशासन शहर के 6,485 बड़े होटल, अस्पताल, शराब की दुकान और प्रतिष्ठान संचालकों पर मेहरबान है। इन सबसे 1.03 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क नहीं वसूला जा रहा। निगम प्रबंधन का सारा जोर गृहकर वसूली पर है। बार-बार नोटिस भी भेजा जा रहा है, लेकिन प्रतिष्ठानों से वसूली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।
नगर निगम में लाइसेंस के कुल 29 मद हैं। इनमें इंश्योरेंस कंपनी, देसी और विदेशी शराब की दुकानें, बीयर शाॅप, मिनी बस, साइकिल, रिक्शा, ज्वलनशील पदार्थ की दुकानें, नाव, मोटर बोट, होटल, गेस्ट हाउस, बारात घर, होटल, नर्सिंग होम, प्राइवेट हाॅस्पिटल, फाइनेंस कंपनी और सिनेमाघर के प्रति शो शामिल हैं। गृहकर के बकायेदारों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। बकाया न जमा करने वालों के यहां कुर्की का नोटिस चस्पा कर बैंक खाते सीज करने की कार्रवाई की जा रही है। जबकि लाइसेंस शुल्क जमा न करने वालों की मौज है।
नगर आयुक्त के आदेश का भी नहीं हो रहा पालन
नगर आयुक्त ने बैठक के दौरान लाइसेंस शुल्क जमा न कराने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने इन सभी बकायेदारों को चिह्नित कर रिपोर्ट मांगी थी। जो अब तक उनके कार्यालय तक नहीं पहुंची है। 31 अक्तूबर की अंतिम तारीख बीते 20 दिन हो गए हैं। बावजूद इसके अब तक किसी के लाइसेंस निरस्त नहीं हुए हैं।
बकाये लाइसेंस शुल्क का अधिभार भी नहीं हो रहा जमा
बीते पांच साल से कई अस्पतालों ने बकाया लाइसेंस शुल्क जमा नहीं किया है। साथ ही इस पर लगने वाले अधिभार को समाप्त करने के लिए आईएमए ने मेयर से मांग की थी। इसेे ध्यान में रखकर मेयर ने अधिभार घटाकर 50 से 10 प्रतिशत किया। बावजूद इसके कई स्वास्थ्य सुविधाओं वाले कारोबारी न तो लाइसेंस शुल्क जमा कर रहे हैं और न ही अधिभार।
निगम की बढ़ जाएगी तीन गुना आय
लेखा से जुड़े जानकारों के अनुसार पिछले दिनों लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी की गई। लागू होने के बाद यदि वसूली गई तो निगम की आय तीन गुना बढ़ जाएगी। हर साल निगम को लाइसेंस शुल्क से 1.30 से 1.40 करोड़ रुपये की आय होती है। शुल्क का रिवाइज रेट वसूला गया तो आय पांच से सात करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।
लाइसेंस शुल्क वसूलने के लिए पिछले दिनों अभियान चलाया गया था। लोगों ने दीपावली और छठ पूजा का हवाला देकर समय मांगा था। छठ पूजा बाद वसूली अभियान तेज करेंगे। - राजेश अग्रवाल, अनुज्ञप्ति अधिकारी