सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना जरूरी है। जो मौजूदा समय में घटता जा रहा है। एमएसएमई उत्पाद के आयात-निर्यात का देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। यह बातें बृहस्पतिवार को मुख्य वक्ता सीए जीडी दुबे ने दी इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया वाराणसी की ओर से बीएचयू के अटल इंक्यूबेशन सेंटर में एमएसएमई निर्यात विषयक पर संगोष्ठी में कहीं। इस दौरान सेंटर के 80 बच्चे मौजूद रहे।
सीए जीडी दुबे ने कहा कि सरकार कि विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) निर्यात में एमएसएमई के योगदान को मान्यता देती है। एमएसएमई विनिर्माण उत्पादन में लगभग 45, देश के कुल निर्यात में 40 प्रतिशत और जीडीपी में 8 प्रतिशत का योगदान देता है। वक्ता डॉ. आशुतोष मोहन ने बताया कि विदेश व्यापार नीति ब्याज समानीकरण योजना जैसे विशिष्ट प्रोत्साहन की पेशकश कर एमएसएमई का समर्थन करती है। जिसके तहत सभी निर्यातक जो सभी आईटीसी (एचएस) कोड में एमएसएमई के रूप में रजिस्टर हैं, उन्हें प्री और पोस्ट शिपमेंट के लिए रुपया निर्यात क्रेडिट के लिए तीन फीसदी की दर से छूट दी जाती है। शुभारंभ शाखा अध्यक्ष सीए अनिल कुमार अग्रवाल ने किया। अध्यक्षता प्रोफेसर डॉ. पीवी राजीव, संचालन डॉ. श्रुति और धन्यवाद शाखा सचिव सीए नीरज कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में सीए सौरभ कुमार शर्मा, सीए वैभव मेहरोत्रा, सीए शिशिर उपाध्याय, सीए रवि सिंह मौजूद रहे।