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दुर्ग विजय का पार्थिव शरीर दतौली पहुंचा

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मऊ के रानीपुर थाना क्षेत्र के दतौली में बुधवार को दरोगा दुर्ग विजय कुमार का शव पहुंचने के बाद गार? - फोटो : MAU
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रानीपुर। सुपारी किलर रोहित की मुजफ्फरनगर में पेशी कराने के दौरान बदमाशों की गोली के शिकार उपनिरीक्षक दुर्ग विजय सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह उनके पैतृक गांव दतौली पहुंचा। इस दौरान परिजन दहाड़े मारकर रो पड़े। बेटी निधि पार्थिव शरीर से लिपट कर बिलख उठी। अपर पुलिस अधीक्षक एसके श्रीवास्तव के साथ फोर्स ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। दतौली गांव निवासी दुर्ग विजय सिंह 1981 में गाजीपुर जिले से पुलिस में बतौर आरक्षी भर्ती हुए थे। प्रमोशन के बाद वह हवलदार हुए। कुछ माह पूर्व उनका तबादला जौनपुर से मिर्जापुर हुुआ था। पुलिस लाइन में उनकी तैनाती थी। दो जुलाई को वह सुपारी किलर रोहित को मुजफ्फरनगर में कोर्ट में पेशी कराने ले गए थे। वापसी के दौरान बदमाशों ने उन्हें गोली मारकर रोहित को छुड़ा लिया था। बुधवार सुबह नौ बजे पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही पत्नी इंदु देवी, पुत्री निधि, ब्यूटी, रागिनी, रूबी के अलावा पुत्र पवन कुमार सिंह बिलख पड़े। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में आंसू आ गए। भाई शेषनाथ सिंह भी रो पड़े। शुभचिंतकों उन्हें सांत्वना दिया। गार्ड आफ आनर के बाद पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए गाजीपुर ले जाया गया। दुर्ग विजय सिंह के बचपन के मित्र और दतौली गांव निवासी सुभाष सिंह पटेल ने बताया कि दुर्ग विजय निर्भीक और मिलनसार व्यक्ति थे। कर्तव्यों के प्रति वह सजग रहते थे। इसी के कारण वह ड्यूटी शिद्दत से करते थे। सुभाष ने कहा कि अब तो सिर्फ दुर्ग विजय की यादें ही रह गई हैं। दुर्ग विजय दो भाइयों में बड़े थे। छोटे भाई शेषनाथ सिंह पीएसी में हवलदार हैं।
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