कबीर प्राकट्योत्सव में विहंगम योग के अनुयायियों का उमड़ा जनसैलाब -----जो स्वयं को जान लेता है,
संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने कहा कि मन को साधिए, जीवन स्वयं सरल हो जाएगा। शांति संसार में नहीं, अपने अंतर्मन में मिलती है। जो स्वयं को जान लेता है, वही जीवन के वास्तविक सत्य को जान पाता है। कबीर महोत्सव के समापन पर सद्गुरु कबीर साहब के प्राकट्य महोत्सव पर स्वर्वेद महामंदिर धाम में देशभर से आए अनुयायियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सद्गुरु कबीर साहब का संपूर्ण संदेश आत्मानुभूति, साधना और जागृत चेतना का संदेश है। केवल वाणी सुनना पर्याप्त नहीं, उसे साधना से जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है। आचार्य स्वतंत्र देव महाराज ने कहा कि कबीर साहब ने बार-बार मनुष्य को अपने भीतर उतरने का आह्वान किया है। सत्य बाहर खोजने की वस्तु नहीं, वह हमारे अपने अंतःकरण में विद्यमान है। इस दौरान सामूहिक ध्यान योग हुआ। मानव मन की शांति के लिए ब्रह्मविद्या विहंगम योग की क्रियात्मक साधना की दीक्षा जिज्ञासुओं को दी गई। इस दौरान 250 आध्यात्मिक ग्रंथों की पुस्तक प्रदर्शनी लगी। विशाल भंडारा में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।