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Varanasi News: काशी में भक्ति-परंपरा के कई रास्ते आकर मिलते हैं, कई मतों-पंथों की धुरी यहीं

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संकट मोचन संगीत समारोह के पांचवें दिन साहित्य मंच पर काशी में भक्ति विषय पर परिचर्चा हुई। साहित्यकार प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने कहा कि काशी में भक्ति परंपरा के तमाम रास्ते आकर मिलते हैं। बनारस तमाम पंथों-मतों की धुरी रही है। काशी ने हमेशा भक्ति के पुराने और नए पाठ और पंथ को सहेजा है। प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा कि काशी में भक्ति की चर्चा कितनी तर्कसंगत है यह संकटमोचन संगीत समारोह से जाना जा सकता है। भक्ति साहित्य का संगीत के साथ बड़ा गहरा रिश्ता है, जिसमें लोक और शास्त्र दोनों के राग सुनाई पड़ते हैं। डॉ. प्रीति त्रिपाठी ने कहा कि काशी में ज्ञान और भक्ति के आद्य आचार्य भगवान शिव स्वयं विद्यमान हैं। डॉ. विंध्याचल यादव ने कहा कि भक्ति की बात जब ही होगी तो बनारस की चर्चा न्यूक्लियस के रूप में होगी। प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि रामानुजाचार्य, बल्लभाचार्य, रामानंद जैसे लोग यहां आकर्षित होकर आए और काशी में भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया। ज्ञान के आधार पर निर्गुण आया और प्रेम के आधार पर सगुण। दोनों ही असल में भक्ति के ही स्वरूप रहे हैं।
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