विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया के बहुत सारे देश ऐसे हैं, जो यह मानते हैं कि भारत के नेतृत्व में उनका हित सुरक्षित है। हमारा प्रयास था कि दक्षिणी गोलार्द्ध के 125 देशों की चिंता और समस्या का निचोड़ निकाल कर जी-20 देशों के सामने रखें। खाद्यान्न, ईंधन, उर्वरक, ऊर्जा और ऋण का संकट दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के सामने न हों। परिदृश्य बदला है, भारत जैसा देश और नरेंद्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री कुछ कहते हैं तो उसे दुनिया में बहुत ध्यान से सुना जाता है। जी-20 देशों ने भी दक्षिणी गोलार्ध के देशों की चिंता को गंभीरता के साथ सुना है और वह एक सशक्त भागीदार के रूप में हमारे साथ खड़े हैं।बड़ा लालपुर स्थित हस्तकला संकुल में जी20 देशों के विकास मंत्रियों के सम्मेलन के बाद विदेशी मंत्री डॉ. जयशंकर पत्रकारों से बात की और कहा कि इस सम्मेलन में जो सहमति बनी है, वह दक्षिणी गोलार्ध के देशों के बहुत काम आएगी। भारत की अध्यक्षता में जी-20 देशों के लिए विकास फोकस बिंदु बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को पता था कि कैसे डिजिटल तकनीक की मदद से भारत द्वारा योजनाओं के लाभ की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है। सतत और हरित विकास संधि के लिए जीवन शैली पर उच्च स्तरीय सिद्धांतों सहित परिणामों पर कार्ययोजना को मंजूरी देते हुए दस्तावेज को अंतिम रूप दिया गया।
विदेश मंत्री ने कहा कि सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों की चिंता के बारे में दुनिया के सामने बात करके बैठक का रुख तय किया था।
गंगा आरती से प्रभावित दिखे मेहमान
वहीं, काशी आए मेहमानों के अनुभव के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि हर कोई गंगा आरती से बहुत प्रभावित दिखा। विदेशी मेहमान दुनिया के पुरातन शहर काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं की छवि लंबे समय तक अपने दिमाग में रखेंगे।