श्री रामचरितमानस सिर्फ एक ग्रंथ नहीं बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जीवन चरित्र है। जो इसका मनन करता है उसके जीवन में रामराज्य अवश्य आता है। श्री रामचरितमानस का कम से कम एक बार पाठ अवश्य करना चाहिए और भगवान राम के जीवन चरित्र से सीख लेनी चाहिए। ये बातें मैहर से पधारे जगद्गुरु स्वामी रामललाचार्य ने कहीं। वह मंगलवार को मारवाड़ी सेवा संघ में श्री मानसपीठ मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट एवं श्री मानसपीठ तीर्थ उत्सव सेवा समिति की ओर से आयोजित सप्त दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव में प्रवचन कर रहे थे। कथा में श्रीकाशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, प्रो. किशोर त्रिपाठी, प्रो. रमाकांत पांडे, स्वामी बृजेशनंद आदि मौजूद रहे।