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मल्हनी: ऐन वक्त पर बिगड़ी बात तो कांग्रेस ने अपनों पर ही रखा हाथ, पूर्व सांसद धनंजय सिंह होंगे निर्दलीय प्रत्याशी

Wed, 14 Oct 2020 03:24 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने भरा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन। - फोटो : अमर उजाला
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पिछले कई दिनों से जौनपुर की मल्हनी सीट पर कांग्रेस से बड़े उलटफेर की चर्चा गर्म थी। राजनीतिक सूत्रों का दावा था कि पार्टी इस सीट पर पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर दांव लगा सकती है। उन्हें 12 अक्तूबर को लखनऊ पहुंचकर पार्टी में शामिल होने का आमंत्रण भी मिल चुका था। मगर कांग्रेस ने ऐन वक्त पर किसी बाहरी की बजाए पुराने कार्यकर्ता पर ही दांव लगाना बेहतर समझा।

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इसके पीछे की वजह कांग्रेस पार्टी के अंदरखाने से विरोध के स्वर उठना बताया जा रही था। उधर, धनंजय सिंह के करीब बता रहे हैं कि उन्होंने खुद कांग्रेस से दूरी बनाई।


उपचुनाव में सबकी निगाहें पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर लगी थीं। रारी नाम से रही इस सीट से धनंजय दो बाद विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2009 में उनके सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में उनके पिता भी विधायक निर्वाचित हुए हैं। वर्ष 2012 और 2017 के चुनाव में भी सपा प्रत्याशी पारसनाथ यादव का सीधा मुकाबला धनंजय सिंह के परिवार से ही रहा है।

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इस बार भी उन्होंने चुनाव में उतरने की पूरी तैयारी की है। बाहुबली और पूर्व सांसद धनन्जय सिंह ने बुधवार को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मल्हनी विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन किया। रिटर्निंग ऑफिसर नीतिश कुमार के समक्ष दो सेट में पर्चा दाखिल किया।

पहले वह निषाद पार्टी से मैदान में उतरने वाले थे। भाजपा ने निषाद पार्टी को जब सीट नहीं दी तो धनंजय सिंह ने निर्दल उतरने का फैसला लिया था। पिछले दिनों अचानक उनके कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में आने से सरगर्मी तेज हुई। दोनों ओर से वार्ता हो चुकी थी।
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12 अक्तूबर को पार्टी में शामिल होने के लिए पूर्व सांसद को लखनऊ में आमंत्रित किया गया था, मगर बाद में मामला बिगड़ गया। करीबियों का कहना है कि कांग्रेस के प्रति लोगों में असंतोष है। लिहाजा इसका नुकसान चुनाव में उठाना पड़ सकता था।

दूसरा अहम कारण अपनी पहचान का भी है। वर्ष 2017 में निषाद पार्टी का साथ होने के कारण पार्टी ने उन्हें मिले वोटों पर अपना दावा ठोंक दिया था, जबकि यह वोट व्यक्ति के आधार पर मिले थे। फिर किसी पार्टी का साथ होगा तो वह पार्टी वोटों को अपने साथ मानेगी।

उधर, कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि बाहरी व्यक्ति को टिकट देने की चर्चा के बाद पार्टी के अंदरखाने में विरोध शुरू हो गया था। इसे भांपते हुए पार्टी ने यह फैसला लिया।
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