सिंधी समाज में मकर संक्रांति तिर मूरी के नाम से जानी जाती है। समाज के लोग कन्याओं की घरों में पूजा कर उन्हें तिल का गजक देते हैं। इस दिन का खास व्यंजन मेथी, मटर, गोभी का पुलाव है। दिन की शुरुआत भगवान झूले लाल के आशीर्वाद से होती है।
मकर संक्रांति पूरे देश में अलग-अलग परंपराओं और पकवानों के साथ मनाई जाती है। कहीं खिचड़ी दान का महत्व है तो कहीं नहान के बाद पूजा और अन्न दान का। बंगाली परिवार पौष संक्रांति के रूप में खुशियां बिखेरते हैं। गुजराती परिवारों में विशेष पकवान बनते हैं। बच्चे और बड़े पतंग उड़ाते हैं।
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Pongal
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सिंधी समाज
सिद्ध गिरीबाग निवासी रोशनी हिरानी बताती हैं कि सिंधी समाज में मकर संक्रांति तिर मूरी के नाम से जानी जाती है। समाज के लोग कन्याओं की घरों में पूजा कर उन्हें तिल का गजक देते हैं। इस दिन का खास व्यंजन मेथी, मटर, गोभी का पुलाव है। दिन की शुरुआत भगवान झूले लाल के आशीर्वाद से होती है।
तमिल समाज
श्रीराम नगर कॉलोनी निवासी जयंती कृष्णमूर्ति बताती हैं तमिल समाज इस पर्व को पोंगल के रूप में मनाता है। फसल कटाई की खुशी में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ चार दिन तक मनाते हैं। चावल और दूध के मिश्रण से जो खीर बनाई जाती है, उसे पोंगल कहा जाता है।
सुंदरपुर निवासी स्वाती नेने
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मराठी समाज
सुंदरपुर निवासी स्वाती नेने ने बताया कि मराठी समाज में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मिट्टी की डबलियों में खिचड़ी, मौसमी फल, तिल के लड्डू रखकर हल्दी, कुमकुम और सुहाग की सामग्री के साथ सुहागिन महिलाओं को देने की परंपरा है। इनमें एक डबलिया घर और दूसरी मंदिर में रखी जाती है। नवविवाहिता गहरे रंग के कपड़े पहनती हैं।
बंगाली समाज
जंगमबाड़ी निवासी सुमिता भट्टाचार्या ने कहा कि मकर संक्रांति को पौष पर्वन के नाम से जाना जाता है। इस दिन सभी लोग घरों में कुल देवता व देवी की विधिविधान से पूजा करते हैं। सभी व्यंजन चावल से बने होते हैं। इनमें खजूर के गुड़ का उपयोग होता है। व्यंजनों में पूली पीठे, गोकुल पीठे, पाटी सप्टा बनते हैं।