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मुख्य भवन व पांडुलिपियां पीढ़ियों के लिए धरोहर से कम नहीं

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विशेष सचिव उच्च शिक्षा अब्दुल समद ने कहा कि सरस्वती भवन पुस्तकालय आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर से कम नहीं है। गोथिक कला से निर्मित ऐतिहासिक मुख्य भवन 231 साल पुराना स्थापत्य समेटे हुए है। यह संस्कृति की धरोहर है और इसे संरक्षित करना स्थापत्य कला व संस्कृति का संरक्षण है। वह बृहस्पतिवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में रुसा से कराए गए कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। विशेष सचिव ने रुसा से प्राप्त धन से व्यय और निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर संतोष जताया। सामान्य प्रशासन के कार्य, निर्माण कार्य और स्टॉक रजिस्टर की भी जांच की। छात्रावास का निरीक्षण कर सचिव ने स्वच्छता पर ध्यान देने और आवश्यक जरूरतों को पूर्ण करने का भी निर्देश दिया। निर्माणाधीन 10 फीट ऊंची चहारदीवारी भी देखी और गुणवत्ता पर संतोष जताया। सरस्वती भवन पुस्तकालय और मुख्य भवन का भी निरीक्षण किया। विश्वविद्यालय स्तर पर किसी भी सामान को क्रय करने के लिये निविदा, जेम पोर्टल के माध्यम से विधिक रूप से कराने के उचित दिशानिर्देश दिए। विश्वविद्यालय के वित्त-लेखा विभाग, संपत्ति विभाग, परीक्षा, कुलपति कार्यालय सहित अन्य विभागों के स्टॉक रजिस्टर का निरीक्षण किया। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने विशेष सचिव का स्वागत किया। इस दौरान कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश, वित्त अधिकारी अमित कुमार, रुसा समन्वयक प्रो. शंभु नाथ शुक्ल, लालजी मिश्र, डॉ. रविशंकर पांडेय, उप कुलसचिव केस लाल थे।
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