औड़िहार। अखिल भारतीय बरनवाल समाज की ओर से शनिवार की रात सैदपुर नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में महाराजा अहिबरन की जयंती मनाई गई। साथ ही बरनवाल समाज का 45वां स्थापना दिवस मनाया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति करके समां बांध दिया। समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष शशिभूषण बरनवाल ने कहा कि समाज के अग्रदूत रहे महाराजा अहिबरन ने वाणिज्य, साहित्य, कला के क्षेत्र में कई कार्य किए।उन्होंने कहा कि बुलंदशहर उनका साम्राज्य था। 997 ईसा पूर्व तक उनकी कई पीढि़यों ने शासन किया। इसके बाद बरनवाल देश के कई हिस्सों में फैल गए। उनकी याद में 25 से 31 दिसंबर तक देश के सभी राज्यों में महाराजा अहिबरन की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। महाराजा अहिबरन ने देश को एकता के सूत्र में पिरोकर राह दिखाने का काम किया। बरनवाल समाज से संगठित होने की अपील करते हुए कहा कि जब तक समाज की भागीदारी सत्ता के विभिन्न पदों पर नहीं होगी, तब तक समाज मजबूत नहीं हो सकता। हम सत्ता में होंगे तो समाज के उत्थान को लेकर अपनी बातों को मजबूती से रख सकते हैं। कार्यक्रम के बाद मुख्य अतिथि ने सभी प्रतिभागी बच्चों को स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र देकर हौसला-अफजाई किया। इसके बाद बरनवाल समाज की महिला विंग का गठन किया गया। सर्वसम्मति से श्वेता बरनवाल को अध्यक्ष,अंशु बरनवाल को महामंत्री चुना गया। बरनवाल समाज का वार्षिक चुनाव कराया गया। राजेश तिरुपति को अध्यक्ष, त्रिपुरारी बरनवाल उपाध्यक्ष, आकाश बरनवाल महामंत्री व मनीष बरनवाल को कोषाध्यक्ष चुना गया। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने महाराजा अहिबरन व मोहनलाल बरनवाल के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस मौके पर अभिषेक बरनवाल, अंकित बरनवाल, दिनेश बरनवाल, बैकुंठ बरनवाल, नागेश्वर बरनवाल आदि मौजूद रहे।