कलाकारों ने दी प्रस्तुति
उन्होंने पंजाबी- कश्मीरी शैली में जब भजनों की प्रस्तुति दी तो मंदिर प्रांगण में मौजूद हर भक्त झूमता नजर आया। उन्होंने गणेश वंदना के बाद 'जय मां दुर्गा अष्ट भवानी' प्रस्तुत किया। उसके बाद कबीर के साखी, शबद से मंदिर को गुंजायमान किया।
अंत में 'छाप तिलक धन छीनी' सुनाया तो भक्त भी सुर से सुर मिलाते नजर आए। उनके साथ तबले पर आनंद मिश्रा, ढोलक पर चंचल सिंह नामधारी, संवादिनी पर मोहित साहनी, बांसुरी पर सुधीर गौतम, साइड रिदम पर संजय रहे।
तीसरी प्रस्तुति काशी के ख्यात भजन गायक अमलेश शुक्ला अमन की रही। उन्होंने सबसे पहले 'दुर्गा मैया का सजा दरबार', 'जय जय दुर्गे नमोस्तुते' एवं 'माँ के दरबार नगाड़ा बजा' आदि भजनों की प्रस्तुति दी। उनके साथ सह गायन में रही आस्था शुक्ला ने 'लाल चूड़ियां चढ़ाऊँ', 'सबसे बड़ा तेरा नाम', पचरा गीत ' लाले रंग मंदिर पर है' सुनाकर समापन किया।
संगत में आर्गन पर रंजन दादा, तबले पर सुधांशु, ढोलक पर भोलागुरु, पैड पर विवेक रहे। कलाकारों का सम्मान महंत राजनाथ दुबे एवं विकास दुबे ने किया। व्यवस्था में चंदन दुबे, किशन दुबे आदि रहे।
भक्तों में प्रसाद भी वितरित किया गया
मां का हुआ पंचमेवा श्रृंगार- श्रृंगार महोत्सव के पाँचवे दिन मां कुष्माण्डा का पंचमेवा श्रृंगार किया गया। नित्य की भांति सायंकाल 4 बजे माँ का पट बंद किया गया, तत्पश्चात पण्डित संजय दुबे ने माँ के पंचामृत स्नान एवं फलोदक स्नान कराया गया। उसके बाद लाल, हरे रंग की विशेष बनारसी साड़ी धारण कराया गया, उसके बाद एडी और माणिक रत्न जड़ित हार पहनाया गया, उसके बाद जलबेरा, जूही और गुलाब के मालाओं से माँ का श्रृंगार किया गया।
इस मौके पर खास तौर से तैयार की गई पंचमेवा की माला से माँ को सुशोभित किया गया। आज के श्रृंगार में हरे पान के पत्तो से माँ का मंडप सजाया गया था। श्रृंगार महोत्सव में पांचवें दिन मां को पाँच कुंतल हलवा, बूंदिया और खीर का भोग लगाया गया और भक्तों में वितरित भी किया गया। श्रृंगार संजय दुबे एवं आरती चंचल दुबे ने उतारी।