खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना
खादी को ‘बेचारा’ की खोल से बाहर निकालने के लिए कई योजनाओं का कार्यान्वयन शुरू हो गया है और कुछ की योजना चल रही है। खादी के कपड़ों की डिजाइन करने की जिम्मेदारी रितु बेरी जैसी नामचीन डिजाइनरों को दी गई है। अपनी गुणवत्ता के बल पर खादी को रेलवे के अलावा कई निजी कंपनियों से करोड़ों का ठेका मिला है। गांवों में क्लस्टर बनाकर खादी के उत्पाद बनाए जाएंगे और उनका आपूर्ति बड़े-बड़े फर्मों को की जाएगी। इससे लोगों, खासकर महिलाओं को रोजगार मिलेगा।
तेलियाबाग स्थित खादी ग्रामोद्योग कार्यालय में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खादी की ब्रांडिंग के लिए अलग-अलग शहरों में फैशन-शो किए जाएंगे। जिसमें बड़े डिजाइनर भी शिरकत करेंगे। सक्सेना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खादी के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं। मौजूदा समय खादी का व्यवसाय 43 हजार करोड़ रुपये सालाना है।
बताया कि इस महीने से बल्क मार्केटिंग योजना शुरू की गई है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति कम से कम 50 हजार रुपये तक का ऑर्डर देगा तो उसे बताए गए पते पर सामान की सप्लाई दी जाएगी। हाल ही में रेलवे से छह लाख चादर और आठ लाख तकिये की आपूर्ति के लिए 40 करोड़ रुपये का करार हुआ है। नैपकीन सप्लाई को लेकर भी समझौता हुआ है।
प्रधानमंत्री के आदर्श गांव जयापुर में गुरुवार से 30 महिलाओं को चरखे पर सूत कातने को प्रशिक्षण देने की शुरुआत हुई। यह प्रशिक्षण एक महीने तक चलेगा। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं सीधे कपड़ा निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगी। जयापुर और आसपास के गांवों से लगभग 400 महिलाओं को खादी योजना से जोड़ा जाएगा। अप्रैल के पहले सप्ताह से कई नई योजनाएं शुरू होंगी।
भारत ही नहीं अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ईरान में भी खादी के आउटलेट्स खोले जाएंगे। खादी उत्पादों की ऑनलाइन खरीदारी भी की जा सकेगी। इसके लिए ई-ट्रेडिंग कंपनियों से समझौते की तैयारी चल रही है।