काशी को विद्या के साथ संगीत का भी शहर कहा जाता है। यहां ऐसे कई उपासक हुए, जिन्होंने संगीत के साथ महादेव की उपासना की। भक्ति का यह मार्ग नादोपासना है। महादेव की इस आराधना में सिर्फ काशी के ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के भी विद्वान शामिल हैं। उन्होंने काशी में हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत को एक साथ लाने का काम किया है।ये बातें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शुक्रवार को कहीं। कुलपति ने कहा कि काशी तमिल संगमम के माध्यम से उत्तर से दक्षिण का संगम हो रहा है। संगीत में भी दोनों क्षेत्रों का मिलन है, परस्पर इस साधना का प्रभाव दोनों जगह की संस्कृतियों पर पड़ेगा। नमो घाट पर काशी तमिल संगमम में संस्कृत विवि के संगीत विभाग की अध्यापिका डॉ. श्रुति सारस्वत उपाध्याय ने सांगीतिक प्रस्तुति दी। तबले पर डाॅ. संतोष सिंह और हारमोनियम पर आलोक मिश्रा ने संगत की।