वाराणसी। तमिल पंचांग के अनुसार मार्गली महीने में काशी तमिल संगमम-2 का आयोजन किया गया है। आठ दिन में तमिलनाडु और पुडुचेरी के लगभग 1400 लोग यात्रा करेंगे। काशी के साथ ही अयोध्या और प्रयागराज का भी भ्रमण करेंगे।
काशी तमिल संगमम के तहत वाराणसी की यात्रा पर आने वाले दल में छात्र, शिक्षक, किसान, कारीगर, व्यापारी, व्यवसायी, लेखक और पेशेवर शामिल रहेंगे। इन्हें सात समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह का नाम एक पवित्र नदी (गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, नर्मदा, गोदावरी और कावेरी) के नाम पर रखा जाएगा। शिक्षा मंत्रालय को इस कार्यक्रम के लिए नोडल बनाया गया है। तमिलनाडु-काशी की कला और संस्कृति, हथकरघा, हस्तशिल्प, व्यंजन और अन्य विशेष उत्पादों का प्रदर्शन करने वाले स्टॉल इस समागम को जीवंत बना रहे हैं। समागम के दौरान होने वाले सांस्कृतिक महोत्सव से दो संस्कृतियों का मिलन होगा।
सम्मेलन में शामिल होने के लिए 8 दिसंबर तक कुल 42,000 रजिस्ट्रेशन हुए थे, जिसमें चयन समिति की ओर से प्रत्येक समूह के लिए 205 लोगों का चयन किया गया। इस भव्य आयोजन में शिक्षा मंत्रालय के अलावा आईआरसीटीसी, रेलवे, पर्यटन, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण (ओडीओपी), एमएसएमई, सूचना और प्रसारण, एसडी एंड ई और उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित विभागों सहित संस्कृति मंत्रालय की भागीदारी है।
समन्वय की जिम्मेदारी दी
पहले चरण से मिली सीख का लाभ उठाने और अनुसंधान के लिए उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए, आईआईटी मद्रास तमिलनाडु और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में काम करेगा। विगत वर्ष 16 नवंबर से 16 दिसंबर 2022 तक काशी तमिल संगमम के पहले चरण का आयोजन किया गया था।