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Commonwealth Games: नीरज चोपड़ा के चोटिल होने के बाद अब काशी के लाल रोहित से पदक की उम्मीदें

Sat, 30 Jul 2022 09:33 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा के चोटिल होने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में अब रोहित यादव पर ही देश की उम्मीदें टिकी हैं।
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बरेका के जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 10वां स्थान हासिल करने वाले बरेका के भाला फेंक खिलाड़ी रोहित यादव बर्मिंघम में इन दिनों खूब पसीना बहा रहे हैं। नीरज चोपड़ा के चोटिल होने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में अब रोहित यादव पर ही देश की उम्मीदें टिकी हैं।

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पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे जैवलिन थ्रोअर रोहित ने बर्मिंघम से फोन पर बताया कि विश्व चैंपियनशिप में स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सका। 78.72 मीटर भाला फेंक कर 10वें स्थान पर रहा। अब एक और मौका मिला है तो देश को निराश नहीं करूंगा। पांच अगस्त को मुकाबला है, कड़ी मेहनत कर रहा हूं।

रोहित पर  पूरे देश की निगाहें टिकी
रोहित के बडे़ भाई राहुल यादव ने बताया कि तीन भाइयों में रोहित दूसरे नंबर पर हैं। इस बार वह जरूर मेडल जीतेगा और काशी का नाम रोशन करेगा। बरेका महाप्रबंधक अंजली गोयल  ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में रोहित के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। उन पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। रोहित का गेम्स में शामिल होना ही बरेका के लिए गौरव की बात है। पदक जीतने पर तो पूरा देश गौरवान्वित होगा।

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कम संसाधनों के बावजूद कॉमनवेल्थ गेम्स, विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शामिल होना बड़ी बात है। खेल सुविधाओं का जिस तरह विकास हो रहा है अब खिलाड़ियों को अच्छी खुराक और प्रशिक्षण के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। - रमेश यादव, एथलीट

पहले एथलीट घास और मिट्टी पर अभ्यास कर प्रतियोगिताओं में शामिल होते थे। अब लालपुर में सिंथेटिक ट्रैक और आधुनिक उपकरणों से अभ्यास करने पर पूर्वांचल के खिलाड़ियों को काफी फायदा मिलेगा। - प्रियंका सिंह पटेल, एथलीट

पिता की कोचिंग से रोहित ने पाया बड़ा मुकाम

फाइनल मुकाबले में रोहित नहीं कर सके अपना बेस्ट प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक ना जीत पाने का मलाल रोहित अब कॉमनवेल्थ गेम्स में दूर करेंगे। बरेका के विद्युत विभाग में वरिष्ठ लिपिक रोहित मूलरूप से जौनपुर के निवासी हैं। जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव के पीछे सफलता की कहानी उनके किसान पिता की कोचिंग मे की गई मेहनत है, जिसके बल पर आज रोहित ऊचाईयों को छू रहे हैं। रोहित के पिता सभाजीत यादव खुद मैराथन धावक रहे हैं। वह मैराथन में सैकड़ों मैडल जीत चुके हैं, उनके तीन बेटे राहुल, रोहित और रोहन हैं।
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उन्होंने ने घर पर ही जैवलिंग थ्रो की कोचिंग देना शुरू किया। सभाजीत ने घर पर ही मेहनत कराकर उन्हें मजबूत बनाया। इसके लिए टंगारा चलाना, वजन उठाना सहित तमाम मेहनत कराना शामिल रहा है। राहुल चोट के कारण आगे नहीं बढ पाया, लेकिन रोहित 2017 में विश्व स्कूल गेम चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतते ही आगे बढ़ता चला गया। 
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