कम संसाधनों के बावजूद कॉमनवेल्थ गेम्स, विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शामिल होना बड़ी बात है। खेल सुविधाओं का जिस तरह विकास हो रहा है अब खिलाड़ियों को अच्छी खुराक और प्रशिक्षण के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। - रमेश यादव, एथलीट
पहले एथलीट घास और मिट्टी पर अभ्यास कर प्रतियोगिताओं में शामिल होते थे। अब लालपुर में सिंथेटिक ट्रैक और आधुनिक उपकरणों से अभ्यास करने पर पूर्वांचल के खिलाड़ियों को काफी फायदा मिलेगा। - प्रियंका सिंह पटेल, एथलीट
फाइनल मुकाबले में रोहित नहीं कर सके अपना बेस्ट प्रदर्शन
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वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक ना जीत पाने का मलाल रोहित अब कॉमनवेल्थ गेम्स में दूर करेंगे। बरेका के विद्युत विभाग में वरिष्ठ लिपिक रोहित मूलरूप से जौनपुर के निवासी हैं। जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव के पीछे सफलता की कहानी उनके किसान पिता की कोचिंग मे की गई मेहनत है, जिसके बल पर आज रोहित ऊचाईयों को छू रहे हैं। रोहित के पिता सभाजीत यादव खुद मैराथन धावक रहे हैं। वह मैराथन में सैकड़ों मैडल जीत चुके हैं, उनके तीन बेटे राहुल, रोहित और रोहन हैं।
उन्होंने ने घर पर ही जैवलिंग थ्रो की कोचिंग देना शुरू किया। सभाजीत ने घर पर ही मेहनत कराकर उन्हें मजबूत बनाया। इसके लिए टंगारा चलाना, वजन उठाना सहित तमाम मेहनत कराना शामिल रहा है। राहुल चोट के कारण आगे नहीं बढ पाया, लेकिन रोहित 2017 में विश्व स्कूल गेम चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतते ही आगे बढ़ता चला गया।