महाराजा बीर विक्रम विश्वविद्यालय अगरतला के कुलपति प्रो. सत्यदेव पोद्दार ने कहा कि वैज्ञानिक शोध प्रविधि के जरिये काशी के इतिहास को नए आयाम देने की जरूरत है। वर्तमान पीढ़ी को काशी की गरिमा बरकरार रखने के लिए आगे आना होगा। काशी अपने पुरातन कलेवर के साथ विकास के नये आयाम लिख रही है। वह शुक्रवार को बीएचयू के इतिहास विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र समागम को संबोधित कर रहे थे। काशी पुनर्विचार, सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विमर्श विषय पर पहले दिन काशी की महत्ता पर विद्वानों का भाषण हुआ। मुख्य वक्ता मारुति नंदन तिवारी ने कहा कि काशी वैश्विक सामाजिक मूल्यों को अभिव्यक्त करती है। यहां के घाट नहीं हैं, बल्कि अपने आप में संस्कृति हैं। उन्होंने इतिहास के शोधार्थियों को ऐतिहासिक मूर्तियों के संरक्षण के लिए आगे आने का आग्रह किया। दूसरे सत्र में पुरातन छात्रों का सम्मान किया गया। पुरातन छात्रों ने पुराने दिनों को याद किया। संयोजक डाॅ. अशोक कुमार सोनकर और डाॅ. सत्यपाल यादव थे। संचालन डाॅ. सीमा मिश्रा और स्वागत प्रो. घनश्याम ने किया। प्रो. बिंदा परांजपे, प्रो. अरविंद कुमार, आरपी पाठक, प्रो. रंजना शील, प्रो. ताबीर, प्रो. आशुतोष उपस्थित थे।