जगद्गुरु विश्वाराध्य जयंती महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को वीर शैव संप्रदाय के अनुयायियों ने गाजेबाजे के साथ अपने आराध्यदेव के साथ रथ यात्रा निकाली। जंगमबाड़ी मठ से दक्षिण भारतीय वाद्ययंत्रों और लोकनृत्य की झांकी देखते बन रही थी। लोग रथ को खींचने के लिए आतुर थे। मठ के पीठाधीश्वर डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी और डॉ. मल्लिकार्जुन विश्वाराध्य शिवाचार्य महास्वामी के सानिध्य में जगद्गुरु विश्वाराध्य का पूजन अर्चन और अभिषेक कर उनके विग्रह को रथपर विराजमान करवाकर यात्रा निकाली गई। मठ से दशाश्वमेध घाट तक चार हजार से ज्यादा अनुयायियों की भीड़ रही। मां गंगा के पूजन के बाद यात्रा पुन: मठ पहुंची, जहां सभी ने सामूहिक ईष्टलिंग पूजा की। दक्षिण भारत से आई शिवलीला पाटील के साथ सौ शिष्यों ने शिव कीर्तन कर सभी को विभोर किया। उत्कृष्ट सेवा के लिए पांच लोगों को समाजभूषण सम्मान दिया गया। इसके पूर्व एकादश रुद्राभिषेक, सहस्र बिल्वार्चन, महामंगला आरती हुई।