बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र और अंतर-सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र में नॉन वायलेंस पर विशिष्ट व्याख्यान हुआ। ह्वाट इज नॉन वायलेंस : अ डायलॉग विद रामचंद्र गांधी, मंटो और महाश्वेता देवी विषय पर व्याख्यान में इस्त्राइल के तेल अवीव विवि से आए मुख्य अतिथि प्रो. डेनियल रावेह ने कहा कि हम सभी प्राणी एक ही नाव के सवार हैं। अहिंसा इस नाव को आगे बढ़ाने वाला चप्पू या इंजन है। अहिंसा जैसे विषय पर भारत के एक प्रमुख आधुनिक विचारक रामचंद्र गांधी और दो प्रमुख साहित्यकारों सआदत हसन मंटो और महाश्वेता देवी पर बात करना काफी रोमांचकारी होगा। गांधी की किताबों ‘आई एम दो’ और स्वराज का उल्लेख करते हुए अहिंसा की बात की। सुबोध गुप्ता की एक कलात्मक कृति एक नाव के चित्र को दिखाया और उसके प्रतीकात्मक अर्थ को बारीकी से समझाया। आगे बताया है कि सआदत हसन मंटो के साहित्य पर बात की। खजुराहो के मंदिरों के भित्तिचित्रों को दिखाया और महाश्वेता देवी की कई कृतियों के माध्यम से लोक में व्याप्त हिंसा और अहिंसा को दिखाया। पतंजलि के ‘योगसूत्र’ पर कहा कि इसके दूसरे अध्याय में अहिंसा की चर्चा हुई है। सवालों के जवाब में प्रो. डेनियल रावेह ने कहा कि गांधी के अनुसार अहिंसा एक महाव्रत (बड़ा संकल्प) है, जो सभी जातियों और मनुष्यों के लिए हर परिस्थिति में अनिवार्य है। दर्शन एवं धर्म विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद मिश्र ने कहा कि भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा के गहन अध्येता प्रो. डेनियल रावेह ने समकालीन भारतीय चिंतकों के साथ काफी समय तक कार्य किया है।