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काशी में मंदिरों का महाकुंभ: मोहन भागवत बोले- देश और संस्कृति के लिए त्याग करने का आ गया है समय

Sat, 22 Jul 2023 06:28 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी के सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में इंटरनेशनल टेंपल्स कन्वेशन और एक्सपो का उद्घाटन शनिवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने किया। अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने कहा कि  हमें अपने आसपास के छोटे-छोटे मंदिरों की सूची बनानी चाहिए। वहां रोज पूजा हो, सफाई रखी जाए। इसमें बड़े मंदिरों को मैं और मेरा का भाव छोड़कर आगे आना होगा। 
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वाराणसी में मंदिर प्रमुखों के महासम्मेलन को संबोधित करते संघ प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिव की नगरी काशी में विश्व के सबसे बड़ा इंटरनेशनल टेंपल्स कन्वेशन और एक्सपो का उद्घाटन शनिवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने किया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में दुनिया भर के मंदिर प्रमुखों को मोहन भागवत ने संबोधित किया। कहा कि मंदिरों के संचालन के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना होगा।

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मंदिर पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक देश को एक सूत्र में पिरो सकते हैं। हर सनातनी का घर मंदिर है और इन मंदिरों को जोड़कर हम भारत को फिर से विश्वगुरू बना सकते हैं। जिसको धर्म का पालन करना है वो धर्म के लिए सजग रहेगा। निष्ठा और श्रद्धा को जागृत करना है। छोटे स्थान पर छोटे से छोटे मंदिर को समृद्ध बनाना है। समय आ गया है कि अब देश और संस्कृति के लिए त्याग करें।

सर्व समाज की चिंता करने वाला मंदिर होना चाहिए

संघ प्रमुख ने कहा मंदिर की व्याख्या की।  कहा कि आम जनता का दुख दूर करने वाला, विपत्ति में आसरा देने वाला, संस्कार देने वाला, शिक्षा देने वाला, उपासना और उनको परमतत्व की प्रेरणा देने वाला मंदिर होना चाहिए। सर्व समाज की चिंता करने वाला मंदिर होना चाहिए। देश के सभी मंदिरों का एकत्रीकरण समाज को जोड़ेगा, ऊपर उठाएगा, राष्ट्र को समृद्ध बनाएगा।
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इंटरनेशनल टेंपल्स कन्वेशन और एक्सपो - फोटो : अमर उजाला
हमारे मंदिर केवल पूजा स्थल ही नहीं सेवा, चिकित्सा, शिक्षा का केंद्र रहे हैं। हमें अपने आसपास के छोटे-छोटे मंदिरों की सूची बनानी चाहिए। वहां रोज पूजा हो, सफाई रखी जाए। इसमें बड़े मंदिरों को मैं और मेरा का भाव छोड़कर आगे आना होगा। मंदिर हमारी परंपरा का अभिन्न अंग हैं। पूरे समाज को एक लक्ष्य लेकर चलाने के लिए मठ-मंदिर चाहिए। हमारे मंदिर, आचार्य, देवस्थान, यति साथ चलते हैं, सभी सृजन के लिए हैं। समय आ गया है कि हम नई पीढ़ी को भी मंदिरों को संभालने का संस्कार दें। कला और कलाकारों को प्रतिष्ठित करें। समाज के कारीगर को प्रोत्साहन मिलेगा तो वह अपने को मजबूत करेगा। कला सत्यम, शिवम सुंदरम का संदेश देती है। मंदिरों की कारीगरी में हमें इसके दर्शन साक्षात होते हैं।

मंदिरों को समय के साथ बदलना चाहिए

मंदिरों को समय के साथ बदलना चाहिए और अर्चकों को प्रशिक्षण देना चाहिए। लचीला कर्मकांड भारत की विशेषता है। उसको पूरी तरह से आचरण में लाना चाहिए। बलि और हिंसा समय के साथ बदली और यह अब नारियल फोड़कर पूजा होती है। देश-विदेश के सात सौ मंदिरों को एक साथ देखकर अच्छा लग रहा है। तीन दिनों के महासम्मेलन के दौरान जो भी योजना बनेगी उस पर श्वेत पत्र जारी किया जाएगा। भले ही सरकारी नियंत्रण वाले मंदिर इसको लागू ना कर पाएं लेकिन बाकी मंदिर एक दूसरे से जुड़कर अपना विकास कर सकते हैं।

मंदिरों में भी चले गुरुद्वारे जैसा लंगर

आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने हर तीन साल में मंदिरों के महासम्मेलन की घोषणा की। उन्होंने कहा, " आम आदमी का पैसा आम आदमी तक पहुंचाया जाए। मंदिर के पैसों से मंदिरों का जीर्णोद्धार हो। जो लंगर गुरुद्वारे में चलता है, वो मंदिरों में भी चले। लंगर में भक्त प्रसाद और भूखे को भोजन मिलेगा। बुक बैंक, मेडिकल हेल्प, लंगर मैनेजमेंट करना होगा। स्वच्छता मंदिरों की प्राथमिकता होगी, फूल प्रसाद समेत सामग्री निस्तारण का फुल प्रूफ प्लान बनाया गया है जो परिवर्तन लाएगा।
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मंच से पीएम मोदी का संदेश पढ़ा गया

मंदिरों के महासम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पढ़ा गया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में महासम्मेलन के आयोजन के लिए शुभकामनाएं व बधाई दी। काशी समेत देश के मंदिरों के विकास और विरासत की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। पीएम ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम, गंगा घाट का सुंदरीकरण देश और दुनियाभर के लिए उदाहरण है। सभी मंदिर मिलकर ही 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' का सपना साकार करेंगे।
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