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Varanasi News: कचहरी स्थानांतरित न होने की दी गई जानकारी

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वाराणसी। सेंट्रल और बनारस बार एसोसिएशन की ओर से कचहरी स्थानांतरण के मुद्दे पर शनिवार को साधारण सभा के लंबित प्रस्ताव पर बैठक बुलाई गई। प्रस्ताव अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह गौतम और मंगलेश दूबे की तरफ से दिया गया था। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वाराणसी के प्रशासनिक न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा से इस मुद्दे पर हुई वार्ता से सदस्यों को अवगत कराया गया। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की तरफ से फिलहाल सिविल कोर्ट के स्थानांतरण का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं होने संबंधी ई-मेल की जानकारी दी गई। साथ ही, मुख्यमंत्री और प्रशासनिक जज का आभार जताया गया। अध्यक्षता बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश सिंह व संचालन महामंत्री सुरेंद्र नाथ पांडेय ने किया। बैठक में मुरलीधर सिंह, कमलेश सिंह यादव, अशोक सिंह प्रिंस, अशोक सिंह दाढ़ी, घनश्याम पटेल, रंजन मिश्र, सुनंदा सहाय, कल्पना पटेल रहे। ब्यूरो
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आरोप सिद्ध न होने पर छेड़खानी का आरोपी दोषमुक्त
वाराणसी। नाबालिग लड़की से छेड़खानी के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अनुतोष शर्मा की अदालत ने आरोप सिद्ध न होने पर कोतवाली निवासी आरोपी अजीत श्रीवास्तव को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष ने बताया कि आदमपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली वादिनी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 18 सितंबर 2016 की रात एक बजे उसकी 17 वर्षीय पुत्री गली में खड़ी होकर आर्केस्ट्रा देख रही थी। तभी मोहल्ले में रहने वाला अजीत श्रीवास्तव उसकी पुत्री को अपने घर की छत से आर्केस्ट्रा देखने के लिए बुलाया। जब उसकी पुत्री उसके छत पर गई तो वह उसके साथ अश्लील हरकत करने लगा। उसकी पुत्री वहां से भाग कर घर आई और वादिनी से सारी बात बताई। अदालत में विचारण के दौरान चार गवाह पेश किए गए। अदालत ने गवाहों के बयान व पत्रावली के अवलोकन के बाद आरोपी को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। ब्यूरो
मस्जिद की जगह मंदिर का स्टीकर लगाने के आरोपी को जमानत
वाराणसी। मार्ग संकेतक पर ज्ञानवापी मस्जिद की जगह मंदिर का स्टीकर लगाने के आरोपी रोशन पांडेय की अंतरिम अग्रिम जमानत अर्जी प्रभारी सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मंजूर कर ली। आरोपी ने गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अधिवक्ता दिनेश दीक्षित के जरिये अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। कहा था कि वह कर्मकांड कराता है और पुलिस ने उसे इस मामले में आरोपी बना दिया है। उसका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। अधिवक्ता कि दलील थी कि जिस बोर्ड पर ज्ञानवापी मस्जिद की जगह मंदिर का स्टीकर लगाया गया था, वह विकास प्राधिकरण का था। उनकी तरफ से मुकदमा नहीं दर्ज कराया गया। मुकदमा पुलिस ने खुद दर्ज किया था। ब्यूरो
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