उदय प्रताप कॉलेज के शोध प्रकोष्ठ में उत्तराखंड के संत ने सक्रिय ध्यान योग पर व्याख्यान दिया। अध्यात्म योग मिशन, हरिद्वार के संस्थापक स्वामी मधुसूदन ने छात्रों को आदि गुरु शंकराचार्य को भारत का श्रेष्ठतम दार्शनिक बताया। महर्षि महेश योगी से अतींद्रिय ध्यान का शिक्षा ले चुके स्वामी मधुसूदन ने कहा कि सभी मनुष्य अपनी प्रसन्नता, संतुष्टि तथा सम्मान के लिए काम करते हैं। भारतीय दर्शन सभी की प्रसन्नता के लिए ध्यान को महत्व देता है। ध्यान का अर्थ है - देखना। इसके लिए अभ्यास की जरूरत है जो व्यक्ति को प्रज्ञा की तरफ ले जाता है और प्रज्ञा चेतना की दिशा में आगे बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि महर्षि पतंजलि का योग, हठयोग, प्राणायाम आदि के माध्यम से ध्यान किया जा सकता है और मानव शरीर के ऊर्जा चक्र जागृत किए जा सकते हैं। आगे कहा कि ध्यान के द्वारा समाधि की उस स्थिति को प्राप्त किया जा सकता है जिसमें शिव और शक्ति का मिलन होता है।