वन वर्ल्ड टीबी समिट में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों को खोजने, उनकी बलगम की जांच व दवाइयां मुहैया कराने की सही व्यवस्था की गई है। मरीजों को पोषण पोटली मुहैया कराई जा रही है। हर टीबी मरीज के बैंक खाते में प्रति माह 500 रुपये भेजे जा रहे हैं ताकि खानपान बेहतर हो सके। निक्षय मित्र भी मरीजों को गोद ले रहे हैं। इसका सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। इस मॉडल से क्षय रोग का उन्मूलन संभव है।
वन स्टॉप टीबी बोर्ड की अधिशासी निदेशक व डब्ल्यूएचओ की डा.लूसिका डीआईटीयू ने क्षय रोग उन्मूलन के भारतीय मॉडल की सराहना की है।। उन्होंने कहा कि गांवों में आशा, एएनएम की ओर से मरीजों और उनके परिजनों को जागरूक किया जा रहा है। समय से दवाइयां देने, जांच में सहयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। पोषण पोटली का वितरण, मरीजों के खाते में धनराशि भेजने, निक्षय मित्रों की तत्परता ने भारत को आगे रखा है। यही मॉडल सही है। इसे दुनिया को अपनाना चाहिए। आगामी सितंबर में न्यूर्याक में होने वाली समिट में भारतीय मॉडल पर मंथन किया जाएगा।
पीएम मोदी ने किया था वन वर्ल्ड टीबी समिट का शुभारंभ
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स्टॉप टीबी बोर्ड की बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को उपयोगी बताया गया। स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने बताया कि मरीजों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक की मशीनें, जरूरी उपकरणों आदि का प्रयोग किया जाएगा। इससे लोगों की समय से हो सकेगी। सटीक परिणाम भी सामने आएंगे। इस दिशा में सरकार ने कदम आगे बढ़ा दिया है। अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर आधुनिक तकनीक युक्त मशीनों से मरीजों की जांच की जाएगी।
कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए जिस तरह वैक्सीन बनाई गई, उसी तरह टीबी पर खात्मे के लिए वैक्सीन बनाने की दिशा में कार्रवाई तेजी से चल रही है। फार्मेसी क्षेत्र में भारत की नई पहचान बनी है। दुनिया आशा भरी नजरों से देख रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने कहा कि जनभागीदारी जरूरी है। अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों के साथ ही समाज के विभिन्न लोगों को आगे आने की जरूरत है।