जगतपुर पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग में चल रही राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य पर वक्ताओं ने विचार रखे। मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा, भारतीय संस्कृति दोनों में एक समानता है। संस्कृत एक ऐसी भाषा है, जिससे भारत बंधा है। उस भाषा के हर शब्द में विज्ञान छिपा है। समापन समारोह में कुलपति ने कहा कि भारत एक भूगोल नहीं, विचार है। भारतीय संस्कृति सबको समाहित करके व्यवहार करने की प्रेरणा प्रदान करती है। सनातन हमेशा हर युग में मानवीयता व इंसानियत की शिक्षा देता है। तकनीकी युग में दया, संवेदना, प्रेम का अभाव होता जा रहा है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद उत्तर प्रदेश के उपनिदेशक डॉ. विनोद कुमार ने शोध को लेकर परिषद की ओर से किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। बिनानी पीजी कॉलेज मिर्जापुर की प्रो. वंदना मिश्रा ने भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व बताया। स्वागत प्राचार्य प्रो. अनिल प्रताप सिंह ने किया। अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य प्रो. रमेश चन्द ने की। संचालन डॉ. विनय प्रकाश शर्मा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नंदलाल शर्मा ने किया।