बीएचयू के संबोधि सभागार में कमला प्रसाद स्मृति व्याख्यान के दौरान अंग्रेजी के प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा कि भक्ति आंदोलन के पुरुष कवियों का स्त्री रूप धारण करना अपने पुरुष अहंकार का त्याग करना है। वक्ता प्रो. माधव हाड़ा ने कहा कि हमारे तर्क भी अपने होने चाहिए और जमीन भी अपनी होनी चाहिए। भक्ति के साथ प्रयोग किए जाने वाले आंदोलन शब्द के पीछे की मंशा को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह समय धर्म में छिपे आडंबरों और रुढि़यों को बाहर निकालने का था। कबीरदास, संत रैदास लेकर ढेरों ऐसी महान विभूतियां आईं जिन्होंने भक्ति आंदोलन का स्वरूप दिया। अखिल भारतीय स्वरूप में स्त्री कवियों की सक्रिय भूमिका रही है। ये कार्यक्रम में बीएचयू के सहभागी के तौर पर भोपाल का कमला प्रसाद स्मृति सांस्कृतिक संस्थान भी रहा। कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य प्रो. आशीष त्रिपाठी ने दिया।