उत्तर प्रदेश विधानमंडल की महिला एवं बाल विकास की संयुक्त समिति (2022-23) की उप समिति के सात सदस्य मंगलवार को जिला महिला अस्पताल पहुंचे। सभापति ने चिकित्सा अधीक्षक से कहा कि महिलाओं को धूप से बचाने के लिए छाया की व्यवस्था कराएं। टोकन व्यवस्था लागू करें। ताकि मरीज बिना लाइन में लगे नंबर आने पर चिकित्सक को दिखा सके। वहीं ओपीडी के निरीक्षण में कोई चिकित्सक नहीं मिला। इससे खफा समिति की सभापति नीलिमा कटिहार ने वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक को कार्रवाई करने को कहा।समिति ने नर्सिंग रूम के बाहर लगी ड्यूटी लिस्ट को रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन अपडेट रखने, जन औषधि केंद्र पर औषधियों की सूची अस्पष्ट मिलने पर फ्लेक्स पर प्रिंट करवा कर लगवाने को कहा। इसके बाद समिति ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शिवपुर पहुंची। यहां बालिकाओं से खानपान व पठन-पाठन के बारे में पूछा। समिति ने बालिकाओं के शयनकक्ष, शौचालय, स्नानागार का निरीक्षण किया। इसके बाद महिला कल्याण विभाग के वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। यहां महिलाओं को दिए जाने वाले परामर्श, कानूनी सहायता मजबूत करने को कहा। इनके अलावा समिति की सदस्यों में मंजू त्यागी, सलोना कुशवाहा, डा सुरभि, चंद्रपाल, बाबूलाल, नादिरा सुल्तान शामिल रहीं। इसके बाद सर्किट हाउस में हुई बैठक में समिति ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने वाली योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कराने को कहा।
विचाराधीन कैदियों के लिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराएं
समिति ने जिला कारागार का निरीक्षण किया। यहां पर महिला कैदियों और विचाराधीन कैदियों को दी जाने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। कारागार अधीक्षक से विचाराधीन कैदियों के मुकदमों में शीघ्र निस्तारण के लिए प्रभावी पैरवी के लिए कानूनी सहायता देने का प्रबंध करने व यहां रह रहे बच्चों की शिक्षा और पोषण की व्यवस्था करने को कहा। जिला कार्यकम अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि बच्चों के लिए एक आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है। समिति महमूरगंज स्थित पाणिनी कन्या महाविद्यालय भी गई।
सौर ऊर्जा को बढ़ावा दें अधिकारी
मिर्जामुराद। बेनीपुर (महेशपट्टी) गांव में पहुंची समिति ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं से सुविधाएं और समस्याओं के बारे में जानकारी ली। समिति ने मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित गीता देवी के घर पहुंचकर बुनकर महिलाओं से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मिलने वाले सहयोग की जानकारी ली। सभापति ने साड़ी बुनाई में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, उत्पादन, मार्केटिंग से होने वाले मुनाफे व समस्याओं आदि के बारे में जाना। महिलाओं ने बताया कि पावरलूम से एक दिन में लगभग दो साड़ियां बन जाती हैं। कहा कि अगर सस्ती बिजली मिले तो कमाई ज्यादा होगी। इस पर उन्होंने सौर ऊर्जा से लघु उद्योग चलाने पर जोर दिया। संतोषी मां स्वयं सहायता समूह की सचिव गीता देवी ने बताया कि समूह में गांव की चार सौ महिलाएं जुड़कर घरेलू उद्योग से परिवार का जीविकोपार्जन कर रही हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के दिलीप सोनकर ने बताया कि गांव में 34 स्वयं सहायता समूह की ओर से 48 पावर लूम चलाए जाते हैं। समिति ने कहा कि महिलाओं के समूह से ही मार्केटिंग एवं ब्रान्डिंग का कार्य करें।