आईआईटी बीएचयू और बीएचयू बनारस सहित देश भर की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने के लिए एक साथ काम करेंगे। मानविकी अध्ययन विभाग स्थित ऐतिहासिक भवन को भविष्य में एक संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। ये बात आईआईटी के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने शनिवार को भारत में अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर और सतत विकास विषय पर दो दिन की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कही। देव एवं वर्धना लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और आईआईटी के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस संबंध को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कुलपति ने बताया कि इस आयोजन ने विरासत और सततता के महत्वपूर्ण विमर्श को सामने लाया है। ये परंपराएं समय के साथ टिकाऊ रही हैं। आईआईटी के मानविकी अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. पीके पांडा ने कहा कि अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को आज एक जीवंत ज्ञान-स्रोत के रूप में ज्यादा मान्यता मिल रही है। प्रो. विनिता चंद्रा ने विचार रखे। इस दौरान प्रो. विकास कुमार दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। प्लेनरी सत्र में ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव डॉ. रजनी कांत रहे।