गोवर्धन पीठ, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने काशी प्रवास के दौरान देसी गायों के पालन और गो-रक्षा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पहले बैलों का उपयोग कृषि और परिवहन में होता था, लेकिन अब यह परंपरा समाप्त होती जा रही है, जिससे समस्याएं बढ़ी हैं। उन्होंने गो-हत्या रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की आवश्यकता जताई और समाज से भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। असि स्थित दक्षिणामूर्ति मठ में दर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में शासन राजधर्म पर आधारित था, जबकि वर्तमान संविधान समानता का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि संविधान ऐसा होना चाहिए जो लोक और परलोक दोनों के लिए मान्य हो और समाज की भावनाओं के अनुरूप हो। वर्णाश्रम व्यवस्था पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने राम, पांडव, विक्रमादित्य, चंद्रगुप्त और छत्रपति शिवाजी के शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि ये व्यवस्थाएं शास्त्रसम्मत थीं। साथ ही छात्रों को नियमित अभ्यास की सलाह देते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास से ही विद्या में प्रगति संभव है। इस दौरान दक्षिणामूर्ति मठ में भगवान दक्षिणामूर्ति सहित 11 शिवलिंगों की वैदिक मंत्रों से चालन प्रक्रिया भी शुरू हुई। रविवार को अधिवास पूजन होगा।