गृहकर की प्रस्तावित दरों पर मांगी गई आपत्तियों पर शुक्रवार को रामनगर जोनल कार्यालय में सुनवाई की गई। नगर निगम की तीन सदस्यीय टीम ने सुनवाई के बाद सभी को आपत्तियों का लिखित जवाब देने को कहा। रामनगर के नगर निगम में शामिल होने के बाद निगम की ओर से गृहकर वसूलने की कवायद की जा रही है। इसी क्रम में निगम ने विज्ञापन जारी कर गृहकर की दर निर्धारित कर दी। यहां के लोगों से इस पर आपत्ति मांगी थी।
इन्हीं आपत्तियाें पर अपर नगर आयुक्त अनूप वाजपेयी, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी असीम रंजन, जोनल अधिकारी शिखा मौर्य की तीन सदस्यीय टीम ने सुनवाई शुरू की। लोगों का कहना था कि पहले से ही रामनगर नगर पालिका के निगम में शामिल किए जाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने सरकार से काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। जब मामला कोर्ट में है तो किस आधार पर गृहकर निर्धारित किया जा रहा है। यह तो सीधे-सीधे अवमानना है।
नियमानुसार नए शामिल क्षेत्रों से पांच साल तक कोई भी कर निगम नहीं वसूल सकता। फिर निगम किस आधार पर गृहकर वसूली की तैयारी कर रहा है। गृहकर की दरें निर्धारित करने से पहले कोई सर्वे नही किया गया। पूरे रामनगर में कहीं भी 12 मीटर या 24 मीटर चौड़ी सड़क नही है। जबकि दर निर्धारण में सड़क की चौड़ाई को आधार बनाया गया है। जो पूरी तरह गलत है। सुनवाई में लक्ष्मेश्वर नाथ शर्मा, संजय यादव, शमशाद खान, राजेन्द्र गुप्ता, प्रशांत सिंह आदि मौजूद रहे।