आज अखंड सौभाग्य की प्राप्ति वाला हरतालिका तीज का व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ये पर्व मनाया जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु एवं कुंवारी युवतियां अच्छा जीवनसाथी पाने के इच्छा से यह व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस बार 30 अगस्त को विशेष योग बन रहा है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा विशेष फलदायी रहेगी।
माता वैष्णवी धाम के ट्रस्टी एवं पुजारी आचार्य पवन शर्मा के अनुसार इस बार हरतालिका तीज पर अति दुर्लभ योग बन रहा है। जो न सिर्फ पूजा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इस संयोग में ग्रहों का व्रतधारी पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। इस दिन शुभ योग और हस्त नक्षत्र का संयोग बन रहा है। शुभ योग 30 अगस्त को एक बजे से 31 अगस्त को 12 बजे तक रहेगा।
शास्त्रों में हस्त नक्षत्र का विशेष महत्व
हरतालिका तीज पर इस बार हस्त नक्षत्र भी रहेगा। शास्त्रों में हस्त नक्षत्र को बहुत ही शुभ माना जाता है। हस्त नक्षत्र हाथ के आकार की तरह होता है। इसमें पांच तारे आशीर्वाद की तरह होते हैं। अखंड शौभाग्य और उत्तम वर की प्राप्ति के लिए इस नक्षत्र में पूजा शुभ फलदायी मानी गई है। हरतालिका तीज पर इस बार व्रतधारी को ग्रह नक्षत्रों का विशेष वरदान मिलेगा।
बीच में न छोड़ें व्रत
यदि कोई महिला हरितालिका तीज का व्रत शुरू कर रही है, तो उसे बीच में व्रत नहीं छोड़ना चाहिए। हर साल ये व्रत पूरे विधि-विधान से करना चाहिए। ऐसा नहीं कि किसी साल ये व्रत किसी कारण से खंडित हो गया तो अगले साल फिर से शुरू कर सकते हैं।