कला प्रकाश की ओर से सांगीतिक शृंखला के क्रम में चिदानंद रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् के तहत मंगलवार को भेलूपुर स्थित एक होटल में सिंगापुर से आए मेवाती घराने के गायक हरिप्रसाद नौट ने अपने घराने की बंदिशों से परिचित कराया। पद्म विभूषण पं. जसराज के शिष्य हरि प्रसाद ने राग शुद्ध कल्याण में विलंबित एक ताल में बोल-लागी पपीहरा... और तीनताल में पियरवा मोरा रे... पेश किया। राग जोग में तीनताल मध्यलय की बंदिश के बोल थे- हनुमान लला मेरे प्यारे...। द्रुत तीनताल में तराना पेश किया। तबले पर पंकज राय, सारंगी पर अंकित मिश्र व हारमोनियम पर हर्षित उपाध्याय ने संगत की। स्वागत अरविंद अग्रवाल, अनिल नागर और पं. रविंद्र नारायण गोस्वामी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अशोक कपूर और संचालन डॉ. आशीष जायसवाल ने किया। इस मौके पर उस्ताद अकरम खान, पं धर्मनाथ मिश्र, हेमांग अग्रवाल, अभिजित अग्रवाल आदि रहे।