भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ज्ञानवापी परिसर में भव्य हिंदू मंदिर तोड़कर उसके ढांचे पर मस्जिद निर्माण के प्रमाण मिले हैं। सर्वे में मिले हिंदू देवी, देवताओं की मूर्तियां, खंडित धार्मिक चिह्न, सजावटी ईंटें, दैवीय युगल, चौखट के अवशेष सहित अन्य प्रमाण एएसआई ने जुटाए हैं। सभी 250 सामग्रियों को प्रमाण के रूप में एएसआई ने जिलाधिकारी की सुपुर्दगी में कोषागार में जमा कराया है। इसकी एक सूची भी जिला जज की अदालत में जमा है। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में कोषागार में जमा सामग्रियां भी हिंदू पक्ष के लिए अहम प्रमाण हैं।
मसाजिद कमेटी के विरोध पर दो दिन रुका था सर्वे
ज्ञानवापी का सर्वे 15 अगस्त 2023 को सार्वजनिक अवकाश के कारण नहीं हुआ था। 16 अगस्त 2023 से छह सितंबर 2023 तक सर्वे जारी रहा। मसाजिद कमेटी के विरोध के कारण सात और आठ सितंबर 2023 को सर्वे नहीं हुआ था। नौ सितंबर 2023 से सर्वे फिर शुरू हुआ। दो नवंबर 2023 को एएसआई ने अदालत को बताया था कि सर्वे का काम पूरा हो गया।
वर्ष 2021 में दाखिल हुआ था मां शृंगार गौरी केस
मां शृंगार गौरी केस की सुनवाई के क्रम में ही जिला जज की अदालत ने ज्ञानवापी के सील वजूखाने को छोड़कर परिसर के एएसआई सर्वे का आदेश दिया था। मां शृंगार गौरी केस राखी सिंह, सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास और लक्ष्मी देवी की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 17 अगस्त 2021 को दाखिल किया गया था। अदालत के आदेश पर एक अधिवक्ता आयुक्त की अगुवाई में 6-7 मई 2022 को ज्ञानवापी में सर्वे की कार्रवाई हुई थी। इसके बाद 14 से 16 मई 2022 तक तीन अधिवक्ता आयुक्त ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे किया था। 16 मई 2022 को ही ज्ञानवापी स्थित वजूखाने में आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था। उसी दिन हिंदू पक्ष की मांग पर अदालत के आदेश से वजूखाने को सील कर दिया गया था।
पश्चिमी दीवार पहले से मौजूद हिंदू मंदिर का बचा हुआ हिस्सा है: ज्ञानवापी मस्जिद पर एएसआई रिपोर्ट
ज्ञानवापी मस्जिद परिसर पर एएसआई की रिपोर्ट से पता चला है कि 17 वीं शताब्दी में पहले से मौजूद संरचना को नष्ट कर दिया गया था और इसके कुछ हिस्से को संशोधित और पुन: उपयोग किया गया था। वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वहां मौजूदा ढांचे के निर्माण से पहले एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था। एएसआई ने यह भी कहा कि मौजूदा ढांचे की पश्चिमी दीवार पहले से मौजूद हिंदू मंदिर का शेष हिस्सा है।