वाराणसी कोर्ट परिसर के बाहर जश्न मनाते हिंदू पक्ष के लोग
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ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट पिछली 19 मई को जिला अदालत में पेश की गई थी। सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताया था।
यहां बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर आधा दर्जन से ज्यादा मुकदमे अलग-अलग कोर्ट में लंबित हैं। मगर, ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के इस मुकदमे को सुनवाई योग्य करार देने के बाद हिंदू पक्ष ने इसे बड़ी जीत करार दिया है।
मुस्लिम पक्ष ने इस मामले को उपासना स्थल अधिनियम के खिलाफ बताते हुए कहा था कि यह मामला सुनवाई के योग्य नहीं है। जिला जज ने इस सिलसिले में दायर याचिका पर पहले सुनवाई करने का निर्णय लिया था। इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर जिला जज की अदालत ने आदेश जारी किया है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम पक्ष बहुत पुराने दस्तावेज पेश कर रहा है, जो इस मामले से संबंधित नहीं है।
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मुख्य बहस पर 21 दिन की सुनवाई
ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी विवाद में पोषणीयता के मामले में वाराणसी के जिला जज एके विश्वेश की अदालत में बीते 24 अगस्त को सुनवाई पूरी हुई थी। सिविल के अभी तक के मामलों में पोषणीयता के मुकदमे में सबसे लंबी सुनवाई हुई है। इस मामले में रूल 7/11 लागू होगा या रूल 6/11 लागू होगा, इसी बात की मुख्य बहस पर 21 दिन की सुनवाई हुई।
वाराणसी कोर्ट के बाहर तैनात फोर्स
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जिला जज के आदेश के बाद हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने इसे सत्य की जीत करार दिया। उन्होंने कहा, अब हम आर्कियोलॉजिकल सर्वे की मांग करेंगे। कमीशन की कार्रवाई में काफी हद तक स्थिति साफ हो चुकी है। हम ज्ञानवापी की सच्चाई सामने लाने के लिए सभी तथ्यों को अदालत में रखेंगे। आगे भी हमारी जीत निश्चित है।
वहीं मुस्लिम पक्ष के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि यह फैसला न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा, हम फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जज साहब ने फैसला 1991 के संसद के कानून को दरकिनार कर दिया है। ऊपरी अदालत के दरवाजे हमारे लिए खुले हैं। न्यायपालिका आपकी है। आप संसद के नियम को नहीं मानेंगे।
वाराणसी कोर्ट परिसर के बाहर वादी महिलाएं
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ज्ञानवापी परिसर स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन के मामले में सोमवार को फैसला आने के बाद कोर्ट में याचिका दायर करने वाली याची महिलाएं खुशी से झूम उठीं। फैसला सुनने के बाद उन्होंने हर हर महादेव का जयघोष किया। इसके साथ ही बम बम बोल रहा है काशी पर झूम उठीं।
कोर्ट परिसर से बाहर आने के बाद याची महिलाओं ने कहा कि यह बड़ा सौभाग्य की बात है कि फैसला सोमवार को ही आया। मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है। कहा कि अब पुरातात्विक सर्वेक्षण और दर्शन-पूजन का अधिकार दिलाने की मांग की जाएगी। महिलाओं ने कहा कि जो भी साक्ष्य मिले हैं, अब उसकी कार्बन डेटिंग कराने की मांग की जाएगी। फैसले के बाद महिलाओं को लोगों ने मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी। इस दौरान याचिकाकर्ता सोहनलाल आर्य, शशांक शेखर त्रिपाठी सहित कई लोग मौजूद रहे।
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