ज्ञानवापी परिसर में दूसरे दिन रविवार को कमीशन की कार्यवाही के दौरान गुंबद, दीवारों और तहखाने की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी की गई। सुबह आठ से 12 बजे तक चलने वाली कार्यवाही डेढ़ घंटे ज्यादा चली। 80 फीसदी से ज्यादा सर्वे की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। सोमवार को भी परिसर में कार्यवाही की जाएगी। सर्वे के बाद बाहर निकले हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि हमने जिन बातों को आधार बनाकर वाद दायर किया था, वह और भी मजबूत हो गया है। सर्वे में जो साक्ष्य व तथ्य मिल रहे हैं, उनसे हमारी राह और आसान हो जाएगी। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष के वकील ने तीन बार ऊंची आवाज में कहा कि कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला।
ज्ञानवापी परिसर में दूसरे दिन की कार्यवाही के बाद वादी पक्ष की ओर से यह दावा भी किया गया है कि गुंबद, दीवार और फर्श के सर्वे के दौरान कई साक्ष्य दबे हुए से दिखे। दीवारों पर पेंट और फर्श के नीचे दबे धार्मिक चिह्नों को लेकर चर्चा रही। कमीशन की कार्यवाही के दौरान टीम के कुछ सदस्यों ने पुरातात्विक सर्वेक्षण की जरूरत भी बताई। अभी सिविल जज सीनियर डिवीजन की ओर से नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त की टीम को वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी का आदेश दिया गया है।
माना जा रहा है कि सोमवार को कमीशन की कार्यवाही के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट में पुरातात्विक सर्वेक्षण का सुझाव अधिवक्ता आयुक्तों की ओर से दिया जा सकता है। साक्ष्य मिलने को लेकर दावे कर रहा वादी पक्ष भी अब इस मांग को नए सिरे से न्यायालय के सामने रख सकता है। शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग पर दायर याचिका में ज्ञानवापी परिसर की हकीकत जानने के लिए कराई जा रही कमीशन की कार्यवाही में कई तथ्य जुटाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान कई जगह खुरचने और थोड़ी खुदाई की जरूरत महसूस हुई। टीम में शामिल एक सदस्य ने बताया कि मां शृंगार गौरी के पास एक स्थान पर पानी लगा था। वह जगह पत्थर से दबा हुआ था। विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह के नेतृत्व में टीम सोमवार को इस स्थान का जायजा लेगी। ज्ञानवापी परिसर काफी बड़ा क्षेत्र बताया गया।
बहुत कुछ जमीन के काफी अंदर दब गया...
सर्वे में क्या मिला, क्या नहीं मिला, इसकी हकीकत सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल होने के बाद ही सामने आएगी। लेकिन, वादी पक्ष की ओर से एक सदस्य ने इस बात का भी दावा किया कि सैकड़ों वर्ष पुराना मामला होने के कारण बहुत कुछ जमीन के काफी अंदर दब गया है। ऐसे में काशी विश्वनाथ मंदिर व अन्य देव विग्रहों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य पुरातात्विक सर्वेक्षण के बाद मिलने के आसार हैं।
यहां बता दें कि फास्ट ट्रैक की अदालत ने पिछले साल अप्रैल 2021 में ज्ञानवापी परिसर में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू आदि विश्वेश्वर मामले में पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को रडार विधि से सर्वे का आदेश दिया गया था। मगर, बाद में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की आपत्ति पर उच्च न्यायालय ने फास्ट ट्रैक अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है।