इससे पहले श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और अन्य विग्रहों की मांग के वाद में भी जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऑर्डर 7 रूल 11 के अंजुमन इंतजामिया के आवेदन को लंबी सुनवाई के बाद खारिज करते हुए वाद को सुनवाई योग्य पाया था। इस पर सत्र न्यायाधीश की अदालत में अभी वाद बिंदु तय होना है, अब यही प्रक्रिया इस वाद में होनी है।
हिंदु पक्ष ने रखी थी यह दलील
इस मामले में वादिनी के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ और अनुपम द्विवेदी ने दलील में कहा था कि ज्ञानवापी के गुंबद को छोड़कर सब कुछ मंदिर का है। ट्रायल होगा तभी पता चलेगा कि वह मस्जिद है या मंदिर। दीन मोहम्मद के फैसले के जिक्र पर कहा था कि कोई हिंदू पक्षकार उस मुकदमे में नहीं था। इसलिए हिंदू पक्ष पर वह निर्णय लागू नहीं होता है।
यह भी दलील दी थी कि विशेष धर्म स्थल स्थल विधेयक 1991 इस वाद में प्रभावी नहीं है। अधिवक्ताओं ने कहा था कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने और मस्जिद बनवाने का आदेश दिया था। वक्फ एक्ट हिंदू पक्ष पर लागू नहीं होता है ऐसे में यह वाद सुनवाई योग्य है।
अंजुमन की तरफ से मामले को खारिज करने के लिए कई तरह के तर्क दिए गए थे। इसमें अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता मुमताज अहमद, तौहीद खान, रईस अहमद, मिराजुद्दीन खान और एखलाक खान ने कोर्ट में प्रति उत्तर में सवाल उठाया था कि जब देवता की तरफ से मुकदमा किया गया तब वादी पक्ष की तरफ से पक्षकार 4 और 5 विकास शाह और विद्याचंद्र कैसे वाद दाखिल कर सकते हैं। यह वाद कैसे विश्वसनीय माना जाय, एक तरफ कहा जा रहा है कि वाद देवता की तरफ से दाखिल है, वहीं दूसरी तरफ पब्लिक से जुड़े लोग भी इस वाद में शामिल हैं।
ज्ञानवापी में स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और अन्य विग्रहों के संरक्षण की मांग पर दायर वाद में सिविल जज की ओर से ज्ञानवापी परिसर में कराए गए सर्वे में 16 मई 2022 को शिवलिंग की आकृति सामने आई थी।
इसके बाद वादी किरण सिंह ने 24 मई 2022 को वाद दाखिल कर वाराणसी के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के साथ ही विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया था। अगले दिन 25 मई को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने मुकदमे को फास्ट ट्रैक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।