शिव मंदिर प्रतापपुर में जगत के कल्याण के लिए हो रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को रामानुज वैष्णवदास महाराज ने कहा कि जगत ही भगवान का स्वरूप है। भगवान स्वयं प्रकृति पुरुष हैं। इसलिए प्रकृति के प्रति समर्पण की भावना हर मनुष्य में होनी चाहिए। रामानुज वैष्णवदास महाराज ने कहा कि हमारे में भी गुण दोष हो सकता है, लेकिन दोष भी भगवान शिव जैसा होना चाहिए। अवगुण स्वरूप होने के बाद भी भगवान शिव पूजनीय हैं। क्योंकि, जगत के कल्याण के लिए उन्होंने विषपान किया। जो अपने परिवार के लिए त्याग करता है वह साधारण व्यक्ति नहीं हो सकता। मानव का परम लक्ष्य मानव कल्याण होना चाहिए। आरती से कथा को विराम दिया। यमजान में रुद्र प्रकाश सिंह, बृजेश यादव, आशू मिश्रा, अजय कुमार सिंह, बबलू सिंह, बच्चा सिंह, बच्चा पांडेय, निरंकार आदि रहे।