भारद्वाजी टोला के कर्मकुल में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन सोमवार को हुआ। बाल व्यास रूपेश पांडेय और प्रभाकर नारायण तिवारी ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया। सुदामा की चावल की पोटली जब कथा में खुली तो लगा मानो हर श्रोता के भीतर भी कोई पुरानी गांठ खुल रही हो। एक ऐसी गांठ, जिसमें वर्षों का अहंकार, चाह और अपेक्षाएं छुपी थीं। उस क्षण यह अनुभव हुआ कि ईश्वर को मूल्य नहीं, भाव चाहिए। कथा का अगला प्रसंग परीक्षित मोक्ष था। कथा व्यास ने बताया कि जिसने जीवन भर भीतर के कृष्ण को जगा लिया, उसके लिए मृत्यु केवल आवरण बदलने जैसा है। इस दौरान यजमान प्रतिभा पांडेय, विनय पांडेय, राघवेंद्र पांडेय, प्रिया पांडेय, आशुतोष पांडेय, रश्मि उपस्थित रहीं।