सोनबरसा गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन रविवार को अयोध्या से पधारे कथा व्यास संत दास ने सच्ची भक्ति और दृढ़ संकल्प से ही ईश्वर की प्राप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने व्यास पीठ से सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, विदुर प्रसंग और कपिलोपाख्यान की कथाएं सुनाईं। उन्होंने बालक ध्रुव की कथा का मार्मिक वर्णन किया। कहा कि सौतेली मां के अपमान से आहत ध्रुव को मां सुनीति ने भगवान की शरण में जाने की सीख दी। मात्र पांच वर्ष की आयु में ध्रुव ने तपस्या कर भगवान नारायण को प्रसन्न किया। उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। माता-पिता को बच्चों को बचपन से ही सनातन धर्म और नैतिक मूल्यों के संस्कार देने चाहिए। कथा के दौरान सुंदर भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। यजमान मुन्नू चौबे, पवन चौबे, अंकित तिवारी, लाल बाबा, विवेक दास ने आरती की।