बीएचयू में शुक्रवार को कला संकाय के वार्षिक युवा महोत्सव संस्कृति का दूसरा दिन रहा। मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के सभागार में प्रतिभागियों ने शास्त्रीय और लोक संगीत के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आवाज दिया। मिथिला नगरिया निहाल सखिया... और तुम उठो सिया, श्रृंगार करो, धनुष राम ने तोड़ा है... जैसे पारंपरिक गीतों ने सभागार को भक्तिमय कर दिया। शास्त्रीय नृत्य का सार, कोलाज निर्माण प्रतियोगिता, टर्नकोट प्रतियोगिता, संस्कृत में काव्य पाठ, हिंदी वाद-विवाद, मिमिक्री, एकल और ग्रुप गायन प्रतियोगिता और क्विज का आयोजन हुआ। एकल और समूह गायन प्रतियोगिता में भारतीय रीति-रिवाजों और परंपराओं पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। शाम को रंगमंच खंड में तीन नाटकों का मंचन किया गया। नीतीश पराशर द्वारा लिखित और निर्देशित साबरीन, जो भोपाल गैस त्रासदी पर आधारित था, ने औद्योगिक आपदा के मानवीय परिणामों को मार्मिक चेहरे दिखाया। अंकित मिश्रा द्वारा लिखित और निर्देशित एकांकी नाटक जगतपुरा जंक्शन का भी मंचन हुआ। इसने अपनी समकालीन कथावस्तु के माध्यम से दर्शकों को जोड़े रखा।