विद्यापीठ को सलाह, खराब सड़कों और क्वालिटी रिसर्च की कमी भी है खराब ग्रेड की वजह
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को मिली बी++ की नैक ग्रेडिंग के पीछे कई वजहों को जिम्मेदार माना जा रहा है। इसमें क्वालिटी रिसर्च की कमी, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में पेपर का पब्लिश न होना, गेस्ट फैकल्टी और संविदा शिक्षकों को पीएचडी कराने का अधिकार न देना और खराब सड़कों की बातें सबसे ज्यादा हो रही हैं। विद्यापीठ अब सी ग्रेड को भुलाकर बी++ ग्रेड के विश्वविद्यालय में आ चुका है, लेकिन कुलपति का कहना है कि वो फिर से मूल्यांकन कराने की अपील करेंगे। विद्यापीठ के लोगों को ये बातें काफी पसंद भी आ रही है, लेकिन कई शिक्षकों ने माना है कि विश्वविद्यालय में अभी भी कई ऐसी मूल समस्याएं हैं, जिन्हें सुलझाए बिना नैक की ग्रेडिंग सुधारना संभव होगा। शिक्षकों को मिले सम्मानजनक वेतन अध्यापक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार उपाध्याय ने बताया कि विश्वविद्यालय का एकेडमिक स्टैंडर्ड उठाने के लिए शोध की गुणवत्ता, नेशनल, इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल्स में प्रकाशन और शिक्षकों को यूजीसी मानक के अनुरूप सम्मानजनक वेतनमान देना भी होगा।
केवल लाइब्रेरी चमका देने से नहीं मिलेगा ग्रेड प्रो. अनिल कुमार उपाध्याय ने बताया कि विद्यापीठ में दोबारा मूल्यांकन कराने पर 0.1 नंबर की कमी पूरी कर ए+ ग्रेड भी पा सकते हैं। गेस्ट फैकल्टी और संविदा शिक्षकों को शोध कराने की अनुमति न देना भी बड़ी वजह है। 25 साल से वे लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन वे शोध कराने को तभी उत्सुक होंगे, जब उन्हें बेहतर वेतन और जॉब सिक्योरिटी मिले। आलम ये है कि संविदा शिक्षक और गेस्ट फैकल्टी अब स्थाई प्रोफेसरों से ज्यादा हो गए हैं।