गोपाष्टमी पर गोशाला में गंगातीरी, गिर, साहिवाल गायों को पंचगव्य और पंचामृत स्नान कराया गया। उसके बाद गायों का रेशमी वस्त्र, मुकुट आभूषण से शृंगार किया गया। पूजन के बाद सभी गायों को गुड़, फल और मिठाई के साथ हरे चारे के रूप में खीरा, लौकी, सेम, साग, गाजर, हरा मटर का भोग लगाया गया। अंत में आरती कर उनकी प्रदक्षिणा की गई।
सोमवार को धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज की तपोस्थली धर्मसंघ (मणि मंदिर) के प्रांगण में गोपाष्टमी पर विविध आयोजन हुए। परिसर में स्थापित स्वामी करपात्री आदर्श गौशाला में सुबह साढ़े आठ बजे से धर्मसंघ महामंत्री पंडित जगजीतन पांडेय ने सविधि पूजन अर्चन प्रारंभ किया। आचार्य रामानंद पांडेय के आचार्यत्व में 11 वैदिक ब्राह्मणों एवं 111 बटुकों ने शुक्ल यजुर्वेद के मंत्रोच्चार के बीच षोडशोपचार विधि से गो पूजन किया। इसके बाद धर्मसंघ की ओर से गोसेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहने वाले गोसेवकों का अभिनंदन भी किया गया। शाम को मंदिर परिसर में 21 आकाशदीप का दीपदान कर गोसेवा का संकल्प लिया गया। इस दौरान कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. रामनारायन द्विवेदी, डॉ. उदयन मिश्रा, अभिषेक मिश्र, प्रमोद मिश्र मौजूद रहे।
मोक्ष के द्वार खोलती है गोसेवा
गोपूजन के बाद धर्मसंघ के महामंत्री पंडित जगजीतन पांडेय ने उपस्थित गोसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि गाय हमारे लिए सिर्फ कहने मात्र की मां नहीं है बल्कि हम इसे अपनी मां की तरह ही सेवा भी करते हैं। गाय सर्वसुख प्रदान करने वाली है, गाय का अवतार ही सर्वकल्याणार्थ हुआ है। गोसेवा से ना सिर्फ सुख समृद्धि प्राप्त होती है अपितु मोक्ष के द्वार भी खुल जाते हैं।