वाराणसी में बाढ में सिंधिया घाट स्थित मंदिर का केवल शिखर ही बचा है।
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गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। बृहस्पतिवार को जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। पहाड़ों पर हो रही बारिश और कई जगहों पर आई बाढ़ इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है। इस कारण घाटों पर दबाव बना है। अभी भी घाटों का आपसी संपर्क टूटा है।
अगस्त महीने की शुरुआत में जलस्तर बढ़ने के बाद से घाटों का संपर्क आपस में टूट गया था। यहां तक कि हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट पर शवदाह में भी परेशानी हो रही थी। इसके बाद अगस्त के दूसरे सप्ताह से जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। अब एक बार फिर से जलस्तर बढ़ने लगा है तो लोगों की चिंताएं भी बढ़ीं हैं।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा का जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर 64.76 मीटर रहा। वाराणसी में चेतावनी बिंदु 70.262 और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। पिछले 12 घंटे में 22 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा है।
बादलों की आवाजाही रही जारी, बारिश के आसार
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। बृहस्पतिवार को बादलों की आवाजाही के साथ ही नम हवाएं भी चलती रहीं। इस कारण गर्मी से लोगों ने राहत महसूस की। भोर में कुछ जगहों पर बूंदाबांदी भी हुई। दोपहर में धूप हुई, लेकिन हवा में नमी अधिक होने की वजह से उसका असर कम रहा। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 26.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार दो दिन तक मौसम ऐसे ही बने रहने के आसार हैं।