गंगा के साथ ही अब गोमती नदी में भी जल मार्ग विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। गोमती में लखनऊ से वाराणसी के बीच जलपोतों के संचालन के लिए इनलैंड वाटरवेज अथारिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) ने सर्वे शुरू कर दिया है। गुरुवार को आईडब्ल्यूएआई की सर्वे टीम चौबेपुर क्षेत्र के कैथी स्थित गंगा-गोमती के संगत तट पर भी पहुंची। यहां के बाद गंगा के रास्ते जलपोत सीधे कोलकाता तक आ-जा सकेंगे।
पीलीभीत से लखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर होते हुए वाराणसी के कैथी स्थित संगम तट तक गोमती नदी की लंबाई 900 किलोमीटर है। कैथी पहुंची सर्वे टीम के सदस्यों ने बताया कि गंगा में जल परिवहन शुरू होने के बाद गोमती के किनारे के क्षेत्रों को भी जल मार्ग से जोड़ने की योजना बनाई गई है। गंगा में जलपरिवहन को विकसित करने पर काम पहले से ही जारी है। अब गोमती में जल मार्ग की संभावनाओं के जरिये जल परिवहन के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देने का उद्देश्य है।
आईडब्ल्यूएआई के सहायक निदेशक एके मिश्रा ने बताया कि गोमती में जलपरिवहन की संभावनाओं के मद्देनजर यह सर्वे कराया जा रहा है। पीलीभीत के माधोटांडा से निकलने वाली गोमती नदी के 518 किलोमीटर लंबाई का सर्वे पहले चरण में किया जाएगा। फिलहाल यहां टर्मिनल के लिए नियारडीह, बाबतपुर, ओदोरामपुर, मोहनदासपुर आदि घाटों का सर्वे किया गया है।