पहली बार रेलगाड़ी में सफर करने का मौका और बनारस जैसे प्राचीन शहर काशी में आकर छह राज्यों के 10 जिलों के 200 आदिवासी युवा प्रफुल्लित हुए। मंगलवार को नेहरू युवा केंद्र की ओर से बीएचयू के शताब्दी सभागार में आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस मौके विशिष्ठ अतिथि डीसीपी काशी जोन आरएस गौतम ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा आदिवासी युवाओं का ये कार्यक्रम कला, संस्कृति, परंपराओं को आपस में साझा करने और काशी के बारे जानने का अच्छा अवसर है। कार्यक्रम में शामिल युवाओं को मणिकर्णिका, दशाश्वमेध जैसे घाट, विश्वविद्यालय, काशी की गलियों के भ्रमण के साथ ही खानपान, गीत संगीत के बारे जानकारी लेने के लिए प्रेरित किया। इस मौकेपर बीएचयू के कुल गुरू बीके शुक्ला, छात्र अधिष्ठाता अनुपम नेमा आदि मौजूद थे।
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़ की कानकेर जिले के 30 युवा ऐसे थे जो अपने गांव ये निकलकर पहली बार ट्रेन सफर का अनुभव किया। महाराष्ट्र के राहुल और छत्तीसगढ़ की रोशनी ने बताया कि गांव में जंगल के जन शैली से निकलकर आधुनिक समाज को देखने का अवसर पहली बार मिला है। जिससे काफी कुछ सीखने को मिलेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की बालिकाओं ने अपनी मात्र भाषा में स्वागत गीत की प्रस्तुती देकर किया।
ये हुई समस्या
काशी भ्रमण पर पहली बार सात दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होने आए युवाओं को बीएचयू परिसर के छात्रावासों में ठहराया गया है। कार्यक्रम के पहले दिन युवाओं को खाने पीने जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम के आयोजन सचिव नेहरु युवा केंद्र के जिला युवा अधिकारी निखिल गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि कार्यक्रम के आयोजन में कुछ कमियां हुई है जिसे आगे सुधारा जाएगा।