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घर की आर्थिक दशा ठीक करने के लिए की सिपाही की नौकरी, फिर सच किया अपना सपना...

Wed, 15 Jan 2020 03:47 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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परिजनों के साथ विनोद यादव - फोटो : amar ujala
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रोहनिया थाने में तैनात सिपाही विनोद यादव के असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के बाद पूरा परिवार बहुत खुश हैं। परिवार की आर्थिक दशा ठीक न होने की वजह से 2011 में उन्होंने सिपाही की नौकरी कर ली। इसके बाद भी वह लगातार शिक्षा विभाग में नौकरी की तैयारी में लगे रहे।

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नौ साल बाद आखिर सफलता मिली। बातचीत में विनोद ने कहा कि सिपाही की ड्यूटी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसके साथ पढ़ाई करना मुश्किल है, मगर सपने साकार करने का जज्बा हो तो चुनौतियां प्रेरणा बन जाती हैं।

परीक्षा परिणाम आने के बाद विनोद ने बातचीत में बताया कि 15 जनवरी 2011 को सिपाही पद पर ज्वाइन किया था। जब लगा कि अब स्थिति थोड़ी बहुत सुधरी है तो आगे पढ़ाई करते रहने की प्रेरणा जगी और फिर अभ्यास शुरू कर दिया। ड्यूटी में जब भी समय मिला परीक्षा की तैयारी चलती रही।
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बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में ही जाने का सपना था। इस उद्देश्य से कभी सब इंस्पेक्टर परीक्षा का आवेदन नहीं किया। वर्ष 2015 में नेट-जेआरएफ करने के बाद भी शिक्षक भर्ती की परीक्षा दी थी लेकिन रिटेन क्वालीफाई नहीं हो पाया था। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी और प्रयास जारी रहा।

हमेशा पिता रामकैलाश यादव और मां शीला देवी ने हौसला बढ़ाया। बताया कि उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2016 में विज्ञापन आया था। आवेदन के बाद पांच जनवरी 2019 को परीक्षा हुई। इसके बाद 27 नवंबर को साक्षात्कार और 14 जनवरी को परिणाम की जानकारी हुई तो बहुत खुशी हुई। सफलता का श्रेय माता-पिता और साथी शैलेंद्र सिंह को देते हुए विनोद ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोड में प्रवक्ता पद पर लिखित परीक्षा का परिणाम भी आ चुका है।

भाईयों की पढ़ाई का भी उठाया बीड़ा

विनोद यादव अपने साथ-साथ दो भाइयों की पढ़ाई का भी बीड़ा उठाए हैं। छोटे भाई संजय यादव और मझले भाई विवेक यादव भी पूरी तन्मयता के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। बताया कि परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, इसलिए अपने साथ-साथ दोनों भाइयों को कभी इसकी कमी नहीं महसूस होने दिया।

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