आज के युवा बहुत जल्दबाजी में रहते हैं। पहले प्रयास में कामयाबी नहीं मिलने पर निराश हो जाते हैं। मैं आज के युवाओं से एक ही बात कहना चाहता हूं। जल्दबाजी में कोई भी काम सही नहीं होता है। जब कभी मेहनत करते हुए निराश हो जाएं तो एक बात याद रखें। रात जितनी गहरी और अंधेरी होगी, सवेरा उतना ही जल्दी होगा। ये बातें रविवार को सुपर 30 कोचिंग के संस्थापक आनंद कुमार ने अमर उजाला से बातचीत में कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों, युवाओं और पढ़ाई से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए।
सवाल: एआई फायदेमंद है या इसका कोई नुकसान है। पढ़ाई में कितना मददगार हो सकता है?
एआई का कोई नुकसान नहीं है। हां, ये जरूर है कि इससे चुनौतियां बढ़ी हैं। एआई से जुड़ी चीजें सीखना और बच्चों को पढ़ाना थोड़ा मुश्किल है। जो पुराने शिक्षक हैं उनके लिए ज्यादा चैलेंज है। जब इंटरनेट और गूगल आया तो लोगों को लगा कि नुकसान होगा लेकिन ये मददगार साबित हुआ। बेशक एआई भी पढ़ाई में मददगार साबि होगा। बशर्ते कि ये बच्चों की सोच को प्रभावित न करे। बच्चों को कुछ लिखना है तो पहले वो खुद प्रयास करें। खुद सोचें। इसके बाद एआई या किसी अन्य की मदद से उसे बेहतर बनाने की कोशिश करें। अगर बच्चे गूगल या एआई पर सीधे आ जाते हैं तो उनकी सोचने की क्षमता विकसित नहीं हो पाएगी। पहले खुद सोचिए और लिखिए। इसके बाद गूगल और एआई का उपयोग करके उसे बेहतर बनाइए। अपनी रचनात्मकता को मत मारिए।
सवाल : बच्चों के लिए कोचिंग कितना जरूरी है?
अगर बच्चा कक्षा नौ और 10 के बाद गंभीरता से पढ़ाई करता है। तर्क वितर्क करने में आगे रहता है तो उसे कोचिंग की जरूरत नहीं। जो अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर हैं, पढ़ाई को पूरा समय दे रहे हैं, उन्हें कोचिंग की जरूरत नहीं। हां, ये जरूर है कि वो स्कूल में अटेंडेंस अच्छी हो। कक्षा में पूरी गंभीरता के साथ मौजूद रहे। कई लोग ऐसे हैं जो कोचिंग नहीं कर पाते हैं और इसके बिना भी बेहतर कर रहे हैं।
सवाल : कामयाबी नहीं मिलने पर युवा आत्महत्या कर रहे हैं। कोटा में इसके हर साल मामले आ रहे हैं। इसे कैसे रोका जा सकता है?
ये बहुत ही दुखद बात है। ये कदम ज्यादातर मध्यम वर्ग परिवार के बच्चे उठा रहे हैं। पहली बार में रिजल्ट सही नहीं आने पर ऐसा कदम उठा लेते हैं। इससे बचाव के लिए माता-पिता को पहल करनी होगी। अपने अधूरे सपने बच्चों पर नहीं थोपने चाहिए। बच्चों को ये यकीन दिलाना चाहिए कि अगर आप फेल भी हो गए हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। माता पिता को बच्चों को एहसास कराना होगा कि दुनिया के किसी भी परीक्षा में इतनी ताकत नहीं है कि वो बच्चे की प्रतिभा की गवाही दे सके।
आजकल युवाओं में आईएएस का क्रेज ज्यादा है?
आईएएस, पीसीएस का क्रेज इसलिए ज्यादा है क्योंकि इसमें आत्मसम्मान की तुष्टि होती है। हर व्यक्ति ऐसी नौकरी चाहता है जिसमें अच्छी सैलरी के साथ समाज में एक अलग पहचान बने। लेकिन, अगर कोई अच्छा पत्रकार है तो जनता की बातों को बेहतर तरीके से रख सकता है। एक अच्छा वैज्ञानिक नई खोज से दुनिया को कुछ नया दे सकता है। युवाओं ये सोचना चाहिए कि आईएएस बनना ही जीवन का लक्ष्य नहीं होना चहिए। हर क्षेत्र में बेहतर करने का अवसर है।