गंगा पार रेती पर टेंट सिटी बसाने वाली दोनों कंपनियों को प्रदेश सरकार ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया है। इस मामले में सरकार ने दोनों कंपनियों पर 17,12,500 रुपये का जुर्माना लगाया है। अपर मुख्य सचिव ने एनजीटी के सामने इसका हलफनामा भी दायर कर दिया है। वहीं, 30 नवंबर को राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान पीठ की चार सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।
एनजीटी के सामने दायर हलफनामे में प्रवेग कम्युनिकेशल लिमिटेड और लल्लूजी संस पर अपर मुख्य सचिव ने जुर्माना लगाने की जानकारी दी है। अपर मुख्य सचिव पर्यावरण मनोज सिंह की ओर से कहा गया है कि दोनों कंपनियों ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। 15 जनवरी से 31 मई तक टेंट सिटी बसाने के लिए रोजाना साढ़े बारह हजार रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया गया है।
वहीं, गंगा पार रेती पर बसने वाली टेंट सिटी मामले की सुनवाई आज होगी। पिछली सुनवाई में गंगा नदी के तल में टेंट सिटी बसाने पर एनजीटी ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कहा था कि नदी तल में टेंट सिटी नहीं बस सकती है। 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई में एनजीटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी एवं विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए सेंथिल वेल की चार सदस्यीय पीठ होगी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सौरभ तिवारी बहस करेंगे। अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि एनजीटी ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, दोनों टेंट कंपनियों व वाराणसी विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था।